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प्लास्टिक टेक्नोलॉजी में चमकाएं भविष्य

पिछले 50 वर्षो में प्लास्टिक व पॉलीमर उद्योग ने काफी तेजी से विकास किया है।  इसके द्वारा बनने वाली वस्तुओं की सूची बहुत लंबी है। दरवाजे, खिड़कियां, रंग, खिलौने, विद्युत उपकरण, कंप्यूटर, टीवी, रेडियो, घरेलू सामान आदि सभी आजकल प्लास्टिक से बन रहे हैं। वास्तव में प्लास्टिक हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुकी है। सीधे शब्दों में कहें,तो प्लास्टिक इस युग का सबसे बड़ा आविष्कार है। दैनिक उपयोग में काम आने वाली अधिकतर वस्तुओं में इसकी भागीदारी बिल्कुल स्पष्ट नजर आती है। यह एक मानव निर्मित पदार्थ है।

प्लास्टिक उद्योग दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। यह प्राय: सभी क्षेत्रों में किसी न किसी रूप में काम में लाया जता है। खिलौनों की दुनिया हो या पैकेजिंग उद्योग अथवा दूरसंचार का क्षेत्र, कोई भी क्षेत्र इससे अछूता नहीं है। कई क्षेत्रों में तो प्लास्टिक आधारस्तंभ का कार्य करता है। प्रत्येक क्षेत्र में प्लास्टिक से बनी  वस्तुओं की मांग रहती है। यह देखा गया है कि हरेक उद्योग में प्लास्टिक से बनी वस्तुओं का आकार भी भिन्न होता है। इसकी संख्या भी अलग होती है और रंग भी भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं। अत: विशेषज्ञ अलग-अलग क्षेत्र के प्लास्टिक में उपलब्ध पदार्थो से नए तत्वों का निर्माण करते हैं। वे प्लास्टिक के रंग को भी नए रंगों में बदलते हैं।

उनकी उत्पादन प्रक्रिया पर पूरी नजर होती है। एक प्लास्टिक विशेषज्ञ के लिए इकोफ्रेंडली प्लास्टिक का निर्माण अत्यंत दक्षता व ध्यान से किया गया कार्य होता है। प्लास्टिक को रीसाइकिलिंग के योग्य बनाना भी एक महत्वपूर्ण काम है। उसके लिए शोध व प्लास्टिक संबंधी वस्तुओं के उत्पादन जसे क्षेत्रों में भी अपार संभावनाएं मौजूद रहती हैं। न केवल प्लास्टिक विशेषज्ञ को प्लास्टिक निर्माण, प्रोडक्शन, रीसाइकिलिंग आदि की पूरी जनकारी होनी चाहिए, बल्कि इस क्षेत्र में बेहतर करने के लिए उसे वश्विक स्तर पर प्लास्टिक व पॉलीमर उद्योगों में नित हो रहे नए विकासों और आविष्कारों का भी ज्ञान होना चाहिए। तभी वह इस उद्योग में सफलता हासिल कर सकता है।

वेतनमान
जहां तक वेतन की बात है, तो प्लास्टिक टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वेतनमान अच्छे हैं। इस क्षेत्र में 4 हजर रुपए से लेकर 26 हजर रुपए तक वेतन मिलता है, तो बहुराष्ट्रीय कंपनियों में 1 से डेढ़ लाख रुपए तक भी सेलेरी मिल सकती है। शोध कार्य से जुड़े अभ्यर्थी को 8 से 13 हजर  रुपए वेतनमान मिलता है। अगर आप किसी संस्थान में बतौर शिक्षक काम कर रहे हैं, तो आपको 16 से 22 हजर रुपए तक वेतनमान मिल सकता है। परियोजना कार्य में वेतनमान की अपनी सीमाएं हैं।

संभावनाएं
इस क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। आज एक छोटा-सा कबाड़ी भी प्लास्टिक के टुकड़ों से अपनी जीविका कमा सकता है। आज प्लास्टिक पूरे विश्व में छाया हुआ है। इसके क्षेत्र का विस्तार अब भी दिन दूनी रात चौगुनी गति से बढ़ता जएगा। देश में एक अनुमान के अनुसार हमारे यहां प्लास्टिक का उपयोग प्रति व्यक्ित 5 किलोग्राम है जबकि चीन में यह 9 किलोग्राम है। विकसित राष्ट्रों में यह दर प्रति व्यक्ित तकरीबन 15 किलोग्राम है। तुलनात्मक दृष्टि से देखा जए, तो भारत में प्रति व्यक्ित प्लास्टिक की खपत बहुत कम है, लेकिन इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। वर्तमान दर लगभग 10% है। प्लास्टिक विशेषज्ञों को इससे रोजगार के और अवसर प्राप्त हो सकेंगे।

प्लास्टिक उद्योग अनेक क्षेत्रों में फैला है। इसमें उत्पादन, विपणन तथा प्रबंधन आदि शामिल है। यहां पर प्रेस आपरेटर, मोल्डर, मशीन आपरेटर, टेबलेट मशीन आपरेटर, इंजीनियर आदि की आवश्यकता होती है। इसकी तकनीक में पर्यवेक्षण, खोज तथा सिंथेटिक पदार्थो द्वारा प्लास्टिक निर्माण जसे अनेक कार्य शामिल हैं। अत: कुशल व्यक्ित आसानी से रोजगार पा सकता है।
संस्थान

प्लास्टिक टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम संचालित करने वाले प्रमुख संस्थान निम्न हैं। 
- लक्ष्मीनारायण इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी-नागपुर (महाराष्ट्र)
- हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट-कानपुर (उत्तर प्रदेश)
- Þाी सयाचमन राजेन्द्र कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग-मैसूर (कर्नाटक)
- बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी-रांची (झरखंड)
- दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग-नई दिल्ली
- यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी-कोलकाता (प. बंगाल)
- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी-नई दिल्ली
-तेजपुर विश्वविद्यालय-तेजपुर (असम)
-इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी-पुणो (महाराष्ट्र)
-केमिकल टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट, मुबई विश्वविद्यालय मुंबई (महाराष्ट्र)
-एल.डी. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग-अहमदाबाद (प. बंगाल)

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