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बदलाव का चस्का

क्या आप बार-बार नौकरी बदलने के आदी हैं? आजकल माहौल ऐसा है कि कॉपरेरेट सेक्टर में लोग करियर चमकाने और फटाफट तरक्की के लिए ‘जॉब-हॉपिंग’ का रास्ता अपनाने लगे हैं, क्योंकि इसके लिए मौके भी खूब खुले हैं। लेकिन दस साल पहले तक माहौल ऐसा नहीं था। तब बार-बार नौकरी बदलने वालों को अच्छी नार से नहीं देखा जता था।

स्थिरता यानी आत्महत्या?
आज के ामाने में नौकरियां बदलना बेहद प्रोफेशनल काम समझ जता है। क्योंकि इसी से बेहतर पद-पैकेज और ऊंची जिम्मेदारियां उठाने के अवसर आप तत्काल पा सकते हैं। इसलिए विशेषज्ञों भी जॉब बदलने की प्रवृत्ति को उचित बताते हैं। आजकल 20-30 आयु वर्ग के लोग औसतन 18 महीने में नौकरी बदल लेते हैं, और 75 प्रतिशत कर्मचारी हमेशा नया जॉब ढूंढ़ते रहते हैं। ाहिर है, एक जगह पड़े रहना आजकल प्रोफेशनल खुदकुशी कहलाता है।
सावधानियां
नौकरी बदलने का जुनून पालना ठीक नहीं होता। इस मामले में सावधानी बरतने की आवश्यकता है। तुच्छ कारणों से नौकरी छोड़कर चलते बनना फायदा तो दूर, कई बार नुकसानदेह साबित हो सकता है। कई नियोक्ता सीवी में आपकी बदलाव की बारंबारता देख कर सशंकित हो उठते हैं, और बिदक भी सकते हैं। इसे वे अस्थिर मति और काम के प्रति निष्ठा के अभाव का प्रमाण समझकर आपको नियुक्त करने से परहेज करते हैं।

इसलिए नौकरी बदलने से पहले कुछ बातों पर ारूर गौर करें। जसे कि नई कंपनी में आपको काम के बेहतर मौके और जिम्मेदारियां मिलेंगी या नहीं। नई कंपनी में आपका ओहदा पहले से बड़ा और भूमिका स्पष्ट है कि नहीं। वेतन पहले की तुलना में ज्यादा है या नहीं। आपमें नई चीजें सीखने की इच्छा और उमंग कितनी है।

जहां तक जॉब-हॉपिंग के बावजूद स्थिरता का सवाल है, आप अपने हुनर का विकास करते रहकर, करियर में आने वाले अंतराल का बेहतर इस्तेमाल करके और अपना नेटवर्क बढ़ाकर स्वयं ही इसकी गारंटी हासिल
कर सकते हैं।

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