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बच्चों के लिए योग

आठ से चौदह वर्ष की आयु जीवन का स्वर्णिम काल होता है। इसमें नया संस्कार, व्यक्तत्व, नैतिक, चारित्रिक, मानसिक, शारीरिक तथा भावनात्मक स्तर में तीव्र विकास के साथ-साथ बच्चे की एकाग्रता, क्षमता, गुणवत्ता में भी परिवर्तन हो सकता है। इस हेतु निम्न योग पैकेज प्रस्तुत है

आसन एवं व्यायाम : इस उम्र के बच्चों के लिए सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, सर्वागासन, वीरभद्रासन, त्रिकोणासन, वृक्षासन आदि उपयोगी हैं। ये सम्पूर्ण शारीरिक तंत्र को स्वस्थ एवं सशक्त करते हैं तथा ग्रंथियों को भी पर्याप्त क्रियाशीलता देते हैं।

वृक्षासन की विधि -
सीधे खड़े हों। बांये पैर को घुटने से मोड़कर इसके पंजे को दांये पैर के नितम्ब जोड़ के समीप रखिए। पैर की एड़ी जोड़ के पास तथा अंगुलियां नीची ओर रखिए। दोनों हाथों को सिर के ऊपर सीधा उठाकर हथेलियों को आपस में जोड़ लीजिए। इस स्थिति में मन को पूरी तरह एकाग्र रखते हुए आरामदायक अवधि तक रुकें, तत्पश्चात् पूर्व स्थिति में आएं। यही क्रिया दूसरे पैर से भी कीजिए।

प्राणायाम : सर्वश्रेष्ठ प्राणायाम है - सरल कपालभाति, यौगिक श्वसन तथा उज्जायी। योग्य मार्गदर्शन में अभ्यास करना चाहिए।

ध्यान : ध्यान के अभ्यास से बच्चों के कोमल, चंचल एवं भावुक मन को सशक्त, दृढ़ तथा एकाग्र बनाया जा सकता है। उनकी एकाग्रता में वृद्घि कर उनके व्यक्ितत्व के स्तर को परिमार्जित किया जा सकता है। बच्चों को रोज दस से पंद्रह मिनट ध्यान करना चाहिए।

आहार : फास्ट फूड, जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, तले-भुने तथा मिर्च मसालेदार खाद्य पदार्थ बच्चों की शारीरिक मानसिक, धारणाशक्ित तथा स्मरणशक्ित को क्षीण
करते हैं।

विशेष : नियमित दिनचर्या अपनायें।

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