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विनायक सेन को सर्वोच्च न्यायालय से मिली जमानत

नई दिल्ली/रायपुर। सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को मानवाधिकार कार्यकर्ता विनायक सेन की जमानत मंजूर कर ली। उन्हें नक्सलियों से संबंध रखने के आरोप में पिछले दो साल से रायपुर की जेल में बंद रखा गया था।

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मरकडेय काट्जू और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की खंडपीठ ने उनकी जमानत मंजूर की। सेन की जमानत मंजूर होने का उनके समर्थकों ने स्वागत किया है। उनकी पत्नी इलिना सेन ने रायपुर में  कहा,‘‘मैं इस आदेश से बहुत राहत महसूस कर रही हूं। न्यायपलिका ने स्पष्ट कर दिया कि सही क्या है। ’’

अदालत में सेन की ओर से पूर्व कानून मंत्री शांतिभूषण उपस्थित हुए। उन्होंने सेन के स्वास्थ्य की खराब स्थिति को देखते हुए अदालत से तुरंत सुनवाई की अपील की थी। न्यायमूर्ति डी. के. जन और न्यायमूर्ति बी. एस. रेड्डी की खंडपीठ ने चार मई को इस मामले में छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी किया था। राज्य सरकार के जवाब पर सुनवाई के दौरान अदालत ने सेन को उपलब्ध बेहतरीन इलाज मुहैया करवाने का आदेश दिया था।

बाल रोग विशेषज्ञ और पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टी (पीयूसीएल) के उपाध्यक्ष 56 वर्षीय सेन पर छत्तीसगढ़ सरकार ने जेल में बंद नक्सलियों का संदेशवाहक होने का आरोप लगाया था। उन्हें 14 मई 2007 को गिरफ्तार किया गया था। चार मई को पूर्व कानून मंत्री राम जेठमलानी सेन की ओर से अदालत में उपस्थित हुए थे।

जमानत मंजूर होने पर छत्तीसगढ़ पीयूसीएल के अध्यक्ष राजेन्द्र के.सेल ने आईएएनएस को बताया कि यह बहुत अच्छी खबर है। हालांकि सेन को जमानत मिलने में दो साल का समय लग गया। इन्हें जमानत दो साल पहले मिल जानी चाहिए थी। स्वयंसेवी संगठन ‘नदी घाटी मोर्चा’ के संयोजक गौतम कुमार बंदोपाध्याय ने कहा कि सेन को जमानत मिलना मानवाधिकार की जीत है।

 

 

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