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चौराहों पर उड़ रही है आयोग के निर्देशों की धचिजयां

आम चुनाव के उत्साह से भरपूर पार्टियां और उनके उम्मीदवार सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर, बैनर और होर्डिग नहीं लगाने के चुनाव आयोग के निर्देशों की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर देश के दूरदराज के कस्बो और गांवों में सड़कों और चौराहों पर खुलेआम धजियां उड़ा रहे हैं। चुनाव आयोग का स्पष्ट निर्देश है कि सरकारी इमारतों सहित किसी भी सार्वजनिक स्थल पर होर्डिग और बैनर नहीं लगने चाहिए क्योंकि वाहन चालकों का ध्यान इस तरफ जा सकता है और इससे दुर्घटना की संभावना यादा रहती है, लेकिन उम्मीदवार प्रचार की खुमारी में इन दिशा निर्देशों की जमकर धजियां उड़ा रहे हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ही कई उम्मीदवारों ने इस तरह के आदेशों की परवाह किए बिना अपना प्रचार शुरू कर दिया है। कुछ प्रमुख पार्टियों के उम्मीदवारों ने नाम की घोषणा होने से पहले ही अपने होर्डिग लगवा दिए थे। कुछ नेताआें ने होर्डिग और बैनर के बारे में उच्चतम न्यायालय के आदेश से बचने का प्रयास करते हुए सिर्फ पोस्टर बनाए हैं और उन्हें बस स्टॉप आदि पर चिपकवा दिया है। यहां तक कि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के सरकारी आवास की दीवार पर भी पोस्टर चस्पां कर दिए हैं। दिल्ली से जुड़े राजमार्गो पर सिर्फ दो सौ किलोमीटर के दायरे में ही देखें तो कोई बड़ा चौराहा नहीं बचता है, जहां विभिन्न दलों के नेताआें के बड़े-बड़े होर्डिग और बैनर नहीं लगे हों। होर्डिंग बड़े और इतने चमचमाते है कि आंखें देखे बिना नहीं मानतीं। रात में तेज रोशनी में ये इतना चमकते हैं कि बरबस ही आने जाने वाले वाहनांे का आकर्षण बन जाते हैं। ड्ढr दिल्ली को हरिद्वार से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 58 पर इन होर्डिग की वजह से कुछ हास्यास्पद स्थितियां भी बनी हैं। हरिद्वार सीट इस परिसीमन में सामान्य सीट बनी है। इस सीट से भारतीय जनता पार्टी ने पहले उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री मदन कौशिक अपना उम्मीदवार बनाया था। बेचारे कौशिक ने पूरे राजमार्ग पर अपने होर्डिग लगा दिए थे, लेकिन भाजपा ने इस सीट पर कौशिक की जगह एक साधु यतीन्द्रनाथ को उम्मीदवार बना दिया। कौशिक के होडिर्ंग की जगह अब जूना अखाड़े के इस साधु के होर्डिग ले रहे हैं। दिल्ली के समीप गाजियाबाद का हर चौराहा और हर सड़क महीनों से भाजपा के अध्यक्ष राजनाथ सिंह के बैनरों और होडिर्ंग से पटे पड़े हैं। गाजियाबाद संसदीय सीट से उन्हें उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा बहुत पहले हो गई थी। तभी से उनके समर्थकों के बीच बड़े-बड़े होर्डिंग बनवाने और उसके नीचे अपना फोटो तथा नाम छापने के लिए होड़ मची है। इसी तरह देहरादून से लेकर उत्तरकाशी तक निशानेबाज जसपाल राणा के बड़े-बड़े होर्डिग बहुत पहले से ही कई जगह देखने को मिल रहे थे। जसपाल भाजपा अध्यक्ष के रिश्तेदार हैं और उन्हें शायद पहले ही टिकट देने का वायदा किया गया था। इसलिए उम्मीदवार बनाए जाने से पहले ही वह अपने होर्डिग और बैनर से देहरादून और पहाड़ों की सड़कों पर नजर आने लगे थे। चुनाव आयोग का कहना है कि राजनीतिक पार्टियां दीवारों पर पहले से चस्पां पेंटिंग और पोस्टरों को मिटा कर अपने पोस्टर नहीं लगा सकती हैं और न ही इस बारे में दबाव बना सकती हैं। गाड़ियों के काफिले के साथ राजनीतिक दल प्रशासन की अनुमति के साथ प्रचार कर सकते हैं, लेकिन प्रत्याशी को इसका विवरण आयोग को देना होगा। आयोग का कहना है कि जो लोग जिस पार्टी अथवा उम्मीदवार को पसंद करते हैं, उसके पोस्टर, बैनर अथवा झंडे अपने घर दुकान या संस्थान पर लगा सकते हैं। चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार सरकारी जगह पर वाल राइटिंग, पोस्टर तथा पेपर चिपकाना, कटआउट लगाना, बैनर अथवा होर्डिग लगाना या किसी को अपमानित करने के लिए इस तरह के प्रयास किए जाने की अनुमति नहीं है।ंंं

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