अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

स्वाइन फ्लू

बर्ड फ्लू सर्दी में जोरों पर था तो गरमी में स्वाइन फ्लू ने हड़कंप मचा दी है। अपने देश के हवाई अड्डों पर ठीक व्यवस्था नहीं बताते। वसे देश में कुžो, सूअर, गाय, बकरियों के आवारा घूमने के दृश्य आम हैं। राजधानियों में ही यह स्थिति है तो कस्बे-गांव की बात क्या करना? बात दरअसल सारे देश की है। अगर देश में स्वाइन फ्लू आया तो आबारा पशु क्या सारे पशुओं से होकर मनुष्यों पर ही हमला होगा। नगर पालिका और पंचायत से जरा आवारा पशुओं के बारे में आंकड़े पूछ लीजिए। वे पीछे-पीछे घूमने वाले नहीं।

हां, परीक्षा, चुनाव से निबटे गर्मी में पानी के लिए भटकते शिक्षक को इस कार्य में लगाने की सिफारिश अवश्य करेंगे। जो मध्याह्न् भोजन से लेकर पल्स पोलियो, जनगणना कराता है। वह पशुगणना करेगा। आवारा बच्चों को स्कूल में रोकता है तो पशुओं की आवारगी गणना भी करेगा। होना यह चाहिए कि सीधे आवारा पशुओं को पकड़ें। दण्ड करें और पीतल पट्टी कान में ठोकें। तभी तो स्वाइन फ्लू रुकेगा। मजे की बात तो यह है कि आवारा सूअर उद्योग नगर पालिका और पंचायत सफाई कर्मचारियों के हैं।

इस कार्य को करना यानी अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना। सरकार महंगे दाम पर खरीद कर बचे-खुचे वन्य क्षेत्र में पहुंचा दे। डाइट की समस्या हल होगी और स्वाइन फ्लू की। यहां पानी ही कम है तो स्वाइन फ्लू की परेशानी क्या ङोली जएगी। दरअसल, नागरिक से लेकर सरकार तक उपेक्षा करते हैं। जब भेड़िया सामने आ जता है तो हाथ-पैर फूल जते हैं। हम जरूरत से ज्यादा ही धार्मिक हैं। आवारा गाय-सांड को पूजते हैं।

वह अगर उस बीमारी से मरने लगे तो हत्या के आरोप और विरोध हो सकता है। यह तो कोढ़ में खाज की सी स्थिति है। शेर जंगल में प्यास से मर रहे हैं। पंछी तापमान से तड़फ कर गिर रहे हैं। ऐसे यह स्वाइन फ्लू। अब क्या होगा। ओझओ-बाबाओ तुम ही ताबीज गंडे डोरे तैयार करो। उसमें से अधिकांश आस्तिक हैं। मंदिर मस्जिद मजर भेरू देवी स्थानों पर दौड़ेंगे। उसे हर तरह से रोकेंगे। उसे सही तरीके से रोकने के लिए तत्परता नहीं है। विडम्बना से कैसे उबरेंगे? यह सवाल वक्त के हवाले है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:स्वाइन फ्लू