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वीडियो गेम्स खेलिए.. बीमार मत बनिए

वीडियो गेम्स खेलिए.. बीमार मत बनिए

ये गेम्स अब सिर्फ टाइमपास व मनोरंजन का साधन ही नहीं रहे, बल्कि अपनी कुंठा निकालने का एक सशक्त माध्यम भी बन चुके हैं। यही नहीं, जो काम लेाग असली जिंदगी में नहीं कर पा रहे हैं, उस काम को भी वे वीडियो गेम्स के सहारे अंजाम देते हैं। साइबर कैफे व वीडियो गेम्स सेंटरों में जाकर देखें, तो कहीं प्रेम में असफल हुआ व्यक्ति अपनी प्रेमिका से कंप्यूटर पर बदला ले रहा है, तो कहीं नौकरी से निकाला गया व्यक्ति अपने बॉस को सबक सिखा रहा है। कहीं कोई व्यक्ित पाकिस्तान पर मिसाइलों व बमों की बारिश कर रहा है, तो कोई जॉर्ज बुश पर जूते फेंकरहा है। और, बच्चे तो ऐसे वीडियो गेम्स को आजमा रहे हैं, जहां वे जितने लोगों को जान से मारेंगे, उतने ज्यादा पॉइंट्स उन्हें मिलेंगे। वीडियो गेम्स का एक विस्तृत संसार विकसित हो चुका है और ऐसे में, यह बहस भी शुरू होना लाजिमी है कि क्या ऐसे गेम्स बच्चों व लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं, या फिर उन्हें हिंसक व मानसिक रूप से बीमार बना रहे हैं।

बच्चों की पसंद.. वायलेंस, थ्रिल

अब बच्चे बच्चे नहीं रहे। कुछ साल पहले तक बच्चों में क्रिकेट, फुटबॉल आदि गेम्स ही लोकप्रिय हुआ करते थे, लेकिन आज की तारीख में यदि आप साइबर कैफे और वीडियो गेम्स सेंटरों में गेम्स खेलने आने वाले बच्चों को गौर से देखें, तो आपको उनकी पसंद को देखकर ताज्जुब होगा। ऐसे बच्चे आपको शायद ही मिलें, जो आम पारंपरिक गेम्स खेल रहे हों। ज्यादातर बच्चे हिंसक गेम्स में ही रुचि ले रहे हैं।  बच्चे कंप्यूटर स्क्रीन पर जितने लोगों की हत्या करेंगे, उन्हें उतने अधिक पॉइंट्स मिलेंगे। जाहिर है, कम हिंसक भावनाएं रखने वाले बच्चों के लिए इस गेम में कोई जगह नहीं। यदि कोई बच्चा इस गेम को आजमाता है, तो उसे अपने स्कोर की खातिर ही सही, पर स्क्रीन आधारित हिंसा में अधिक से अधिक से दिलचस्पी लेनी पड़ेगी।

एक और गेम है यू एंड दे। यह गेम कैसा है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसमें यह कहा जाता है कि हर कोई आप को मारना चाहता है। जिधर देखो, दुश्मन ही दुश्मन नजर आते हैं। ऐसे में, खुद को बचाने का एक ही रास्ता है- सबको मार डालो। यदि एक भी आदमी बचा रह गया, तो वह आप को मार डालेगा। 

मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले के बाद एक नया वीडियो गेम आया है- अटैक पाक। हालांकि भारत सरकार पाकिस्तान पर सिर्फ डिप्लोमैटिक दबाव बनाने पर ही जोर दे रही है और हमले के बारे में विचार भी नहीं किया जा रहा, लेकिन इस वीडियो गेम में बच्चों और किशोरों की दुनिया ने पाकिस्तान पर अटैक कर दिया है। और वह भी पारंपरिक हथियारों से नहीं, बल्कि मिसाइलें दागी जा रही हैं। दोनों ओर से भयानक बमबारी होती है। आखिर में भारत की जीत होती है और पाकिस्तान तबाह हो चुका होता है।

टीन्स-यूथ.. प्यार का चक्कर

किशोरों और युवाओं के बीच आम तौर पर प्रेम संबंधी कुंठा को निकालने वाले गेम्स पॉपुलर हैं। शी विल चीट यू नामक गेम में एक लड़की आती है। वह अपनी मादक अदाओं से लड़के को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करती है। वह लड़के के सामने प्रेम का इजहार करती है। गेम में लड़के को कुछ ज्यादा ही शरीफ दिखाया गया है। कुछ दिन सब कुछ ठीक ठाक चलता है, लेकिन इसी बीच, लड़की को एक अमीर लड़का प्रेम का प्रस्ताव देता है और उसके बाद, वह उस अमीर लड़के के साथ नजर आने लगती है। यही नहीं, वह अपने पहले प्रेमी को पहचानने तक से इंकार कर देती है। फिर शुरू होता है बदला लेने का दौर और आखिर में, लड़की मारी जाती है।
किशारों व युवाओं के बीच अमेरिका के पूर्व प्रेजिडेंट जॉर्ज बुश को जूते मारने की भी होड़ लगी हुई है। एक इराकी पत्रकार द्वारा बुश पर जूते फेंकने की घटना के तुरंत बाद ही इस पर आधारित कई गेम्स मार्केट में आए गए। इस घटना को केंद्र में रखकर बनाए गए ज्यादातर गेम्स में पॉइंट्स पर बात पर दिए जाते हैं कि आप जॉर्ज बूश पर जूतों से कितनी बार सटीक निशाना लगा पाते हैं।   

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