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मां की आंखो का तारा, दुलारी बिटिया

मां की आंखो का तारा, दुलारी बिटिया

माँ इतना ध्यान रखे

1.आप पढ़ाई में अव्वल रही होंगी, पर बच्चे को अपना उदाहरण देकर उसके मन में असन्तोष को जन्म न दें। उसकी कक्षा की कुछ लड़कियां भी उससे पढ़ाई में आगे हो सकती हैं, उनसे तुलना न करें। हर बच्च अपने में असाधारण हैं। तुलना उसके मन में नाराजगी और कुंठा को जन्म दे सकती है।

2.सिर्फ पढ़ाई पर जोर नहीं होना चाहिये। उसके व्यकतित्व के बहुआयामों को समझने के लिये उसे हर विधा आजमाने का मौका जरूर दें। नृत्य, संगीत, कला, खेल। आप तो उसके अंदर छुपे कलाकार से चमत्कृत हो ही जएंगी, आप उसे भी अनगिनत खुशियाँ दे पाएंगी।

3. उसकी भी समस्याएं हैं, पर समस्याओं को समस्या कहकर न पूछें। ‘आज क्या-क्या हुआ’ पूछ कर आप पूरे दिन की जनकारी रुचिपूर्वक सुनें। इतना थोड़ा सा समय देकर आप शायद उसकी सबसे अच्छी मित्र बन जती हैं। साथ ही मित्रों से, टीचर्स के साथ आप उसके रिश्तों को भी पहचान पाती हैं, जो आज बहुत जरूरी है। यदि बच्चों को पूरी दिनचर्या को हम एकाग्र चित्त से सुनें तो कई बार हम उनके बाल जीवन की परेशानियों और संभावित दुर्घटनाओं को रोक सकते हैं।

4. बेटी से नाराज होकर कभी भी सार्वजनिक स्थल पर या घर के अंदर भी अतिथियों के सामने उस पर अपना रोष व्यक्त न करें। आप उसे अपनी नाराजगी का अहसास फिर भी करवा सकती हैं। जसे वार्तालाप सीमित करके या स्पष्ट रूप से पर शांतिपूर्वक अपनी बात कहकर।

5. आपका दिमाग कभी -कभी बड़ा अशान्त हो उठता है, घर या बाहर की परिस्थितियों से। अपनी परिस्थितियों में घुटिये नहीं, वरन् बिटिया को सॉझी बनाइये। परिस्थितियाँ बदल तो नहीं जएंगी, पर उसका साथ आपमें एक नई हिम्मत और ऊज्र देगा। बेटी के लिये माँ से ऊँचा कोई दूसरा आदर्श नहीं होता, इसलिये माँ को कभी भी परिस्थितियों से हार नहीं माननी चाहिये, क्योंकि वही संदेश आपकी बेटी ग्रहण करेगी। आपका दृष्टिकोण ही उसका जिन्दगी के प्रति नजरिया तय करेगा।

और, बेटी का फर्ज है

1. माँ, घर में रहे या बाहर, वह दिन भर काम ही करती है। ऐसे में यदि बिटिया अपने हाथों से माँ को चाय की प्याली या जूस का ग्लास पकड़ाये तो माँ का भी चित्त प्रफुल्लित हो उठता है।

2. आपको स्कूल में या कॉलेज में एक वातावरण मिलता है, उसका अपना असर होता है, जबकि घर में माँ कुछ दूसरी बात कहती नजर आती है, ऐसे में सामंजस्य मुश्किल हो जता है। पर ध्यान रहे कि माँ के ऊपर आप अपना गुस्सा न निकालें। माँ को समझइये कि क्यों आप माँ का चाहा या सोचा नहीं कर पा रही। ज्यादा उम्मीद है कि माँ आपकी बात समझ जये और अपनी इच्छा न मनवाये।

3. कभी-कभी माँ को ऑरगेनाइज होने में मदद करिए। यदि माँ की छोटी -छोटी चीजें उनके डॉक्युमेन्ट्स आप संभाल कर फोल्डर में रख दें, और माँ को उनकी याद दिला दें, तो माँ को बहुत तसल्ली और सुकून मिलेगा।

4. अपनी समस्यायें, उलझनें माँ से कभी न छुपायें। माँ भी तो उम्र के इस दौर से गुजर चुकी है, जिससे आप गुजर रही हैं। जिन्दगी से तब वो कैसे रूबरू हुई थी, आप उसके अनुभवों से सीख सकती हैं। माँ को यदि आपने सब बातों से वाकिफ रखा तो कोई समस्या या व्यक्ित आपको परेशानी में नहीं डाल सकता।

5. क्यों न इस मदर्स डे के दिन आप माँ को उसके बीते दिनों की याद ताज करवायें। उसके पुराने मित्रों के फोन नम्बर खोज कर माँ को दें। गुजरे हुये दिन शायद माँ को सुखदतम परिस्थितियों में से हों। माँ को भी अहसास होगा कि उसकी बिटिया उससे अलग नहीं, बल्कि उसकी प्रतिमूíत है, मन ही मन वह आपकी कृतज्ञ और आपका यह कदम आप दोनों को और भी जोड़ेगा।


याद रखने और अभ्यास करने की बात है, माँ और बेटी का रिश्ता है, अथाह प्रेम और विश्वास का। इसमें नकारात्मक भावों का कोई स्थान नहीं।                                   

 

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  • Web Title:खूब जमेगी जोड़ी मां-बेटी की