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चूं-चूं का मुरब्बा

बचपन से चूं-चूं के मुरब्बे का जिक्र सुना है। पल्ले कभी नहीं पड़ा है कि यह किस नायाब श का नाम है? बड़े बुजुर्ग एक दूसरे से कहते कि भया, अपने मेयर साहब दुनिया भर का सैर-सपाटा कर के लौटे हैं, अब जने शहर का कैसा चूं-चूं का मुरब्बा बनाने ज रहे हैं। अभी तक तो सड़कों पर चलना मुश्किल है, कौन कहे आगे क्या होने वाला है।

लगता है इसका ताल्लुक जरूर ट्रैफिक के सिपाही से है। अगर ऐसा नहीं है तो सड़क पर सफर करनेवालों की परेशानी का बयान क्यों करते बुजुर्ग। हम फिर चक्कर में पड़ते। ‘चूं-चूं’ तो चिड़िया को कहते हैं। हमने कभी गाना भी सुना था- ‘चूं चूं करती आई चिड़िया’। हमें चिंता हुई। क्या यह बुजुर्गवार, चिड़िया का मुरब्बा बनाने की बात कर रहे हैं? क्या पता, कितनी नन्हीं गौरय्या शहीद होंगी, तब जकर के उस मोटे थुलथुल ट्रैफिक के सिपाही का पेट भरेगा।

फिर ख्याल आया कि घर में मां-दादी आम का मुरब्बा बनाती हैं, वह तो मीठा होता है। हमने मां के पीछे-पीछे जकर, कच्चे आमों को कटते-छिलते देखा है। इस कटाई-छिलाई के बाद उनके घावों में नमक छिड़क कर आमों को धूप में रख दिया जता है। इस के पश्चात कढ़ाई में चीनी की चासनी बनाकर, कटे आम उसमें डुबोए जते। मसालों का स्मरण नहीं, इतना याद है कि चीनी डूबे आम के टुकड़ों की नियति धूप में पकने की थी। हमें सुकून मिलता इस विचार से कि अपने शाकाहारी घर में गौरय्या का खून-खच्चर मुमकिन नहीं है। पर कहीं न कहीं तो बेचारी गौरय्या के साथ यह नाइंसाफी होती ही होगी, वर्ना कैसे बनेगा चूं चूं का मुरब्बा?

थोड़ा बड़ा होकर इस सुखद सच से साबका पड़ा कि चूं चूं का मुरब्बा वास्तविकता न होकर, सिर्फ एक मुहावरा है। दिल को वाकई राहत मिली कि गौरय्या सुरक्षित है। वह धूप में तपे भले, पर उन्हें टुकड़े-टुकड़े होकर आंगन या छत पर, सूरज के ताप में पकना नहीं है। हम और उम्रदार हुए। पढ़ाई-लिखाई पूरी कर नौकरी शुरू की। फिर भी इस मुहावरे का अर्थ, राज का राज ही रहा। बस यही लगा कि चूं चूं का मुरब्बा किसी बेहद भद्दे, बेमेल मिश्रण को कहते हैं जसे कश्मीरी दम आलू में कोई कच्च कद्दू डाल दे, नहीं तो रबड़ी-मलाई में प्याज-लहसुन का तड़का। विगत की मिली-जुली सरकारें देख कर मन में संशय उभरता है कि उसूल की घरेलू गौरय्या सियासत के जंगल में गुम हो गई है कहीं। यह भी मुमकिन है कि प्रदूषण के जहर से चल बसी हो। अब सत्ता का स्वाद चखने के लिए चूं चूं के मुरब्बे जसी सरकारें बना रहे हैं नेता।

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