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द्रमुक पुराण

आम चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी के नेता अमर सिंह ने कहा था कि अगर उनकी पार्टी इस बार केंद्र की सरकार का समर्थन करेगी तो वह इसकी पूरी कीमत वसूलेगी। यह नौबत नहीं आई कि इस बार संप्रग को समजवादी पार्टी से समर्थन लेना पड़ता। लेकिन तमिलनाडु की द्रविड़ मुन्नेत्र कषघम इस स्थिति में है और वह बाकायदा ताल ठोक कर कीमत वसूलने पर उतरी हुई है। वह चाहती है कि केंद्र में उसके लोगों को सबसे अहम पद मिलें। जितने मलाईदार मंत्रालय हैं वे उसके हिस्से में आएं। मलाईदार मंत्रालय का एक अर्थ ऐसे मंत्रालय होता हैं, जिसमें ऊपरी कमाई काफी होती हो, थोड़ी देर के लिए इस अर्थ को छोड़ भी दिया जए तो मंत्रिपदों की मांग के पीछे एक इच्छा यह होती है कि इनके सहारे ज्यादा से ज्यादा परियोजनाओं को अपने प्रदेश में लगाने का रास्ता तैयार कर लिया जए। द्रमुक को कुछ ही समय बाद विधानसभा चुनाव का समाना करना है और वहां जीत के लिए उसे यह जरूरी भी लग रहा है। लेकिन द्रमुक की यह चाहत एक साथ कई मान्यताओं के खिलाफ जती है। एक तो यह कि मंत्रिमंडल में किसे कौन सा पद देना है, यह तय करना पूरी तरह प्रधानमंत्री का अधिकार होता है। सहयोगी दल अगर इसके लिए अपना कोई दावा पेश करता है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन उसे जिद बना लेना और फिर हर तरह का दबाव डालना किसी अच्छे भविष्य की तरफ संकेत नहीं करता। दूसरे, एक केंद्रीय मंत्री सिर्फ अपने प्रदेश और अपने लोगों का ही भला करे, या अपने प्रदेश और अपने लोगों का दूसरों के मुकाबले ज्यादा भला करे इस सोच को बदला जना भी जरूरी है। केंद्रीय मंत्री का काम नियम और नीतियां बनाना होना चाहिए, परियोजनाओं का आवंटन नहीं। परियोजनाओं के आवंटन के लिए ऐसी संस्थागत व्यवस्था जरूरी है, जिससे परियोजना उसी जगह लगे, जहां उसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

लेकिन द्रमुक का संकट अपनी पार्टी के लोगों के लिए अधिक से अधिक मंत्रिपद हासिल करने से कहीं ज्यादा बड़ा है।  करुणानिधि को एक साथ अपने बेटे, बेटी, भतीजे और अपने खास लोगों को तुष्ट करना है। इसे लेकर उनके परिवार और पार्टी दोनों में ही महाभारत है। तमिलनाडु में तो यह महाभारत एक बार सड़कों पर दंगे फसाद तक पर उतर चुकी है। परिवारवाद राजनीति को किस दर्जे तक ले जता है द्रमुक इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण है। लेकिन मनमोहन सिंह के पास कोई विकल्प नहीं, उन्हें सरकार इन सबके साथ ही चलानी होगी और नतीजे भी देने होंगे।

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  • Web Title:द्रमुक पुराण