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नौकरशाही को हावी नहीं होने दूंगा

दिल्ली के सत्ता समीकरणों के लिए वे एक एकदम नया नाम हैं। हालांकि चंद्र प्रकाश जोशी राजस्थान सरकार में ग्रामीण विकास और शिक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण विभाग संभाल चुके हैं, लेकिन दिल्ली के गलियारों में उनका नाम पहली बार ही सुनाई दिया है। कुछ ही समय पहले राजस्थान विधानसभा की नाथद्वारा सीट से वह महज एक वोट से चुनाव हार गए थे। उस सयम चर्चा थी कि अगर वे जीत जाते तो मुख्यमंत्री बनाए जा सकते थे। लेकिन इस बार जब लाेकसभा का चुनाव लड़ा तो डेढ़ लाख से भी ज्यादा वोट से जीते। उन्हें राहुल गांधी का नजदीकी माना जाता है और वे राजस्थान के उन नेताओं में गिने जाते हैं जिनकी आलाकमान में काफी सुनी जाती है। शपथ लेने के तुरंत बाद उनसे रू-ब-रू हुए विशेष संवाददाता सुशील शर्मा -

पहली बार सांसद बने और कैबिनेट मंत्री भी बना दिए गए। क्या आपको ऐसी उम्मीद थी?

कैबिनेट मंत्री बनने की कोई उम्मीद नहीं थी। यह तो सोनियाजी, राहुल और प्रधानमंत्री की कृपा थी कि यह सौभाग्य मिला। हम देश भर में राजनैतिक सक्रियता को प्रोत्साहित करना चाहते हैं। इसका मतलब है कि हम जमीनी स्तर पर ऐसे राजनीतिक कार्यकर्ताओं को बढ़ावा देना चाहते हैं, जो सरकार की नीतियों को बढ़-चढ़ कर लागू करने के लिए गांवों में काम करें। हम चाहते हैं कि अगले पांच वर्षों तक ग्रामीण विकास की दिशा में अभूतपूर्व काम करें।

गांवों को शहरों जैसी सुविधाएं देने के बारे बातें तो बहुत होती हैं, लेकिन ऐसे क्या कारण हैं कि इस लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सका?

जब तक पंचायतों को वित्तीय अधिकार नहीं दिए जाएंगे और अधिकारों का विकेन्द्रीकरण नहीं होगा, तब तक लक्ष्य प्राप्ति संभव नहीं है। संविधान में पंचायती राज को लेकर 7३-६4वें संशोधन हो चुके लेकिन राज्य से पंचायतों तक धन के बंटवारे को सुनिश्चित करने का कोई प्रबंध नहीं किया गया। जैसे संविधान में संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची होती है, वैसे ही एक पंचायत सूची का होना भी जरूरी है। हमारी सरकार यह कोशिश करेगी कि हम पंचायतों को मजबूत करें, ताकि गांवों का विकास भी शहरों की तरह हो सके।

अक्सर कहा जाता है कि लालफीताशाही के कारण विकास की गति मंथर पड़ती है। नौकरशाही से निपटने के लिए क्या रणनीति होगी?

मैं राजनीतिक नेतृत्व पर नौकरशाही को हावी नहीं होने दूंगा। हां, उनकी बातें राय जरूर लूंगा लेकिन एक बार फैसला होने के बाद अफसरों को उसे लागू करना होगा। मेरी कोशिश होगी कि अपने अफसरों की टीम को प्रोत्साहित करूं, उनका सही मार्ग दर्शन करूं लेकिन उनके दबाव में न आऊं।

क्या ग्रामीण विकास और पंचायती राज को मजबूत करने के लिए दोनों मंत्रालयों का विलय होना चाहिए?

राजस्थान में मैंने दोनों मंत्रालय संभाले हैं। सुचारु काम के लिए दोनों का एक होना बेहतर होता है। हम पंचायतों की मजूबती में ही ग्रामीण विकास की कुंजी है। हम चाहते हैं कि पार्टी कार्यकर्ताओं को चुनाव के समय टिकट दे कर उम्मीदवार बना देना काफी नहीं है। हम जब उन्हें राजनीतिक नौकरशाह बना कर गांवों में काम करने और नतीजे दिखाने को पैमाना बनाना चाहते हैं। आगे बढ़ने के लिए कार्यकर्ताओं को जमीन पर काम कर के दिखाना होगा। हम अगले पांच वर्षों में बेहतरीन काम कर देश का सर्वांगीण विकास करना चाहते हैं। हमारा लक्ष्य है कि 2014 में राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनें।

राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी विकास का नारा दिया था लेकिन राजस्थान में यह क्यों नहीं चला?

इसका सबसे बड़ा कारण था जनता के बीच उनकी विश्वसनीयता का न होना। जब तक नेता विश्वसनीय नहीं होगा तब तक विकास का नारा भी काम नहीं करेगा। सफलता के लिए जरूरी है कि नेता की विश्वसनीयता और जमीन पर विकास होता दिखे।

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