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आडवाणी को बचाने की मुहिम जोरों पर

भाजपा के लौह पुरुष लालकृष्ण आडवाणी को बचाने की मुहिम ने जोर पकड़ लिया है। मुहिम के तहत सोमवार को भाजपा संसदीय दल की विस्तारित बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और पार्टी के सभी महासचिव शामिल होंगे। आडवाणी बचाओ मुहिम के तहत इस बैठक में सर्वसम्मति से उन्हें पंद्रहवी लोकसभा का नेता चुनने का प्रस्ताव लाया जा सकता है। ड्ढr विपरीत इसके आडवाणी विरोधी खेमा भी इस अभियान की हवा निकालने में जुटा गया है। आडवाणी के कटु आलोचक मुरली मनोहर जोशी ने अपना मुंह भी खोल दिया है। उन्होंने कहा कि चुनाव में पार्टी की हार के पीछे गलत टिकट वितरण जिम्मेदार है। इसी के साथ उन्होंने कहा कि आडवाण्ीा ने नेता विपक्ष का पद छोड़ने का फैसला कर अच्छा उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें पार्टी ने जिम्मेदारी सौंपी तो वे पीछे नहीं हटेंगे। संघ परिवार की चली तो जोशी ही लोकसभा में विपक्ष के नेता बनेंगे। इस बीच संघ परिवार के वरिष्ठ नेताओं भैया जी जोशी, सुरश सोनी और मदनदास देवी ने आडवाणी से उनके निवास पर मुलाकात की। सूत्रों ने बताया कि इन तीनों नेताओं ने आडवाणी को सुझाव दिया कि भाजपा की कायाकल्प करने के लिये उन्हें पद छोड़ देना चाहिये। आडवाणी के नजदीकी और पार्टी प्रवक्ता बलबीर पुंज ने भी संकेत दिया है अब वे अपने फैसले पर पुर्नविचार नहीं करंगे। उन्होंने बताया कि पार्टी के नेता उन्हें मनाने में जुटे हैं, लेकिन वे अपने फैसले पर अड़े हैं। पार्टी सूत्रों ने संकेत दिये हैं कि नेता प्रतिपक्ष के लिये मुरली मनोहर जोशी और सुषमा स्वराज का नाम सबसे आगे है। आडवाणी बचाओ मुहिम को चलाने वाले सोमवार को अपनी अंतिम लड़ाई लड़ेंगे। इस मुहिम को चलाने वालों में अरुण जेतली, नरेन्द्र मोदी, वेंकैया नायडू, अनंत कुमार जसे नेता शामिल हैं। ये पार्टी का वही गैंग है जिसके हाथ में चुनाव अभियान और प्रबंधन की कमान थी। इन नेताओं का मानना है कि यदि आडवाणी बने रहते हैं तो चुनाव समीक्षा के बाद उन्हें दोषी नहीं ठहराया जायेगा और कोई बड़ी गाज भी नहीं गिरेगी। इस अभियान समिति को आडवाणी का पूरा समर्थन प्राप्त था। जोशी या सुषमा के नेता विपक्ष बनने के बाद इन नेताओं के पर पूरी तरह से कतर दिये जायेंगे, क्योंकि ये दोनों ही नेता हार के जिम्मेदार नेताओं को सबक सिखाने की बात कर रहे हैं। यदि मुहिम चलाने वाले नेता आडवाणी को नेता प्रतिपक्ष बनवाने में कामयाब नहीं होते, तो उनका अगला कदम हो सकता है किआडवाणी जी को एनडीए का अध्यक्ष बना दिया जाये। लेकिन इस सोच पर यह सवाल उठता है कि फिर अटल बिहारी वाजपेयी का क्या होगा। याद रहे कि वाजपेयी मौजूदा समय में एनडीए के अध्यक्ष हैं।

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