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गया के हुनर की फ्रांस में नुमाइश

गया का जिक्र आते ही लोगों के जेहन में एक समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा की तस्वीर उभर आती है। कभी शाम ढलते ही सजती थीं फनकारों की महफिलें और शरीक होते थे शहर के मख्सूस। मशहूर सिने अदाकारा नर्गिस की मां जद्दन बाई,बेगम अख्तर, ठुमरी गायक रामू जी सहित देश के नामचीन कलाकार उसकी शोभा बढ़ाते थे। आज इन महफिलों का चलन भले ही खत्म हो गया हो। लेकिन, यहां की कला की रवानी में कमी नहीं आई है। यहां के युवा फनकार रंगमंच से लेकर फिल्मों के विभिन्न क्षेत्रों में गहरी रुचि ले रहे हैं और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।ड्ढr ‘द स्लमडॉग मिलियनियर’ को ऑस्कर अवार्ड मिला तो उसकी गूंज यहां भी सुनाई पड़ी।ड्ढr ड्ढr उस फिल्म में जिले की वजीरगंज की अनुराधा सिंह को ग्रुप एडीटिंग के लिए अवार्ड मिला। उनकी एडीटिंग काफी सराही गई। अब युवा निदेशक अभिजीत की बारी है। गया शहर के निवासी अभिजीत ने ‘नम: शिवाय शान्ताय’ नामक फिल्म बनायी है जिसे फ्रांस के 62वें कान फिल्म फेस्टिवल में कल यानी सोमवार को इंडिया पैविलियन में दिखाया जाना है। अभिजीत निर्देशित यह फिल्म कान में प्रदर्शित की जाने वाली तीस फिल्मों-जोधा अकबर, आमिर, डेल्ही-6, 8 ७ 10 तस्वीर, तार जमीन पर इत्यादि के साथ शुमार हैं और नौवें स्थान पर हैं।ड्ढr ड्ढr यह फिल्म महोत्सव 13 मई को शुरू हुआ है और 24 मई तक चलेगा इसमें 4000 मीडियाकर्मी और फिल्म इंडस्ट्री के तीस हाार प्रतिनिधि शिरकत कर रहे हैं। ‘नम: शिवाय शान्ताय’ एशिया की पहली फिल्म है जो अत्याधुनिक रड वन डिजिटल कैमर से शूट की गई है। न्यूजीलैंड से यह कैमरा मंगाकर हिमालय की तराइयों में इसकी शूटिंग की गई ।ड्ढr भगवान शिव को प्रतीक मानकर बनाई गई इस दो घंटे की फिल्म में नैरशन फिल्म निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा ने दिया है। साथ ही राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित फिल्म ‘पतंग’ की निर्मात्री दूर्वा सहाय ने प्रोडक्शन डिजायनर का काम किया है। अभिनय और निर्देशन में कई बार सम्मानित हो चुके अभिजीत ने फिल्म और टीवी प्रोडक्शन में मास्टर की डिग्री की है। वे सन् 2001 से इस क्षेत्र में कार्यरत हैं।

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