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जदयू के बागियों ने ही दी मंत्रियों को पटखनी

जदयू के दो बागियों ने ही जदयू कोटे के दो मंत्रियों को पटखनी दी है। वहीं प्रदेश मंत्रिमंडल से हटाये गये चार पूर्व मंत्रियों ने लोकसभा चुनाव जीत अपनी अहमियत फिर से स्थापित कर दी है। उन्हें पार्टी के साथ ही लोगों ने भी सिर माथे चढ़ा लिया है। सीवान जिला के जदयू नेता ओम प्रकाश यादव का टिकट काटकर जदयू नेतृत्व ने सूबे के ग्रामीण कार्य मंत्री वृशिण पटेल को सीवान से लोकसभा चुनाव लड़ाया। पर स्थानीय होने और राजद के बाहुबली निवर्तमान सांसद शहाबुद्दीन से लगातार भिड़ने का लाभ उन्हें मिला। यहां तक कि सीवान से सैयद शहाबुद्दीन के वर्चस्व को खत्म करने के लिए भाजपा के कई नेताओं ने भी पार्टी लाइन से अलग हटकर जदयू के बागी ओम प्रकाश यादव के पक्ष में अप्रत्यक्ष काम किया। स्थिति यह हुई कि वृशिण पटेल नामांकन के दिन से अंत-अंत तक सीधी लड़ाई में नहीं आ सके।ड्ढr ड्ढr बांका में जार्ज के करीबी होने के कारण दिग्विजय सिंह को जदयू के टिकट से हाथ धोना पड़ा। उनके खिलाफ भी जदयू ने सूबे के समाज कल्याण मंत्री दामोदर रावत को चुनाव में उतारा। वहीं राजद की तरफ से केन्द्रीय मंत्री जयप्रकाश नारायण यादव बांका से चुनाव लड़े। चुनावी रणनीतिकारों ने जातीय समीकरण के आधार पर दिग्विजय सिंह की लड़ाई को गंभीरता से नहीं लिया। पर जब रिजल्ट आया तो दिग्विजय सिंह ने सार अनुमानों को ध्वस्त करते हुए चुनाव जीत जदयू नेतृत्व के फैसले को गलत साबित कर दिया। दूसरी ओर करीब एक वर्ष पूर्व सूबे के मंत्रिमंडल से हटाये गये चार पूर्व मंत्रियों मोनाजिर हसन, अजरुन राय, विश्वमोहन कुमार और वैद्यनाथ महतो ने लोकसभा चुनाव जीत फिर से अपनी अहमियत स्थापित कर दी। पार्टी नेतृत्व के साथ ही क्षेत्र के लोगों ने भी इन पूर्व मंत्रियों के कार्यो पर भरोसा जताया और भारी मतों से जीता कर उन्हें फिर से पुरानी प्रतिष्ठा लौटा दी। किसने किससे छीना दुर्गड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। किसने अपना दुर्ग बचाया और किसने किससे छीना? नतीजे आने के साथ ही यह बहस का मुद्दा बना हुआ है। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में भाजपा पांच सीटें जीती थीं। इस बार उसके खाते में 12 सीटें आई हैं। सिर्फ बक्सर सीट वह नहीं बचा पाई है बाकी-पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर और अररिया सीट पर उसका कब्जा कायम रहा है। अररिया में उसने सीटिंग सांसद सुखदेव पासवान का टिकट काट दिया था मगर अंतत: यह सीट भी वह निकालने में कामयाब रही। इसके साथ ही उसने पश्चिमी चम्पारण, पूर्वी चम्पारण, शिवहर, दरभंगा, पटनासाहिब, गया और नवादा सीट राजद के कब्जे से छीन ली है। पश्चिम चम्पारण और नवादा (इस बार सुरक्षित नहीं) सीट राजद ने गठबंधन के तहत लोजपा को दिए थे जबिक गया में अपने उम्मीदवार बदल दिए थे। मधुबनी सीट भाजपा ने पिछली बार गंवा दिया था जिसे इस बार उसने कांग्रस से फिर छीन ली है।ड्ढr ड्ढr इसी तरह जद यू पिछली बार छह सीटों पर जीता था। इस बार उसने इनमें पांच सीटें-मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, नालंदा, बाल्मीकिनगर और काराकाट (बिक्रमगंज) बचाने में कामयाब रहा है जबकि अपने सबसे अभेद्य समझे जाने वाले दुर्ग-महाराजगंज गंवा दी है। इसके साथ ही उसने राजद से सीतामढ़ी, उजियारपुर, झंझारपुर, मधेपुरा, गोपालगंज (सु.), खगड़िया, मुंगेर, आरा और जहानाबाद जबकि कांग्रस से औरंगाबाद सीट सीट छीन ली है। पाटलिपुत्र और जमुई (सु.) के रूप में दो नई सीटें इस बार जद यू के खाते में गई हैं। राजद सिर्फ वैशाली और सारण के ही अपने किले को बचा पाया जबकि जगदानन्द सिंह ने बक्सर और उमाशंकर सिंह ने राजद के लिए नया दुर्ग कब्जाया। लोजपा ने इस बार अपने चारों किले गंवा दिए हैं। इनमें तीन-सहरसा (सुपौल), हाजीपुर और समस्तीपुर पर जद यू का कब्जा हो गया जबकि बलिया सीट नए परिसीमन की भेंट चढ़ गया। कांग्रस ने जहां सासाराम का किला बचाया है जबकि राजद से उसके किशनगंज के दुर्ग को छीन लिया है।ं

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