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जुमलों की लड़ाई का एक दौर खत्म

लोकसभा चुनाव के परिणाम सामने आने के साथ ही बिहार में 1से लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के बीच चल रहे जुमलों की लड़ाई के दौर का भी अंत हो गया। बीस साल राज करने के अपने सबसे चर्चित जुमले को लालू प्रसाद ने साकार कर दिखाया। नीतीश कुमार भी इस मायने में बहुत पीछे नहीं रहे। मूंज की जड़ में मठ्ठा डालने (राजद को समाप्त करने) की अपनी बात को उन्होंने भी कमोबेश पूरा कर दिया साथ ही लालू प्रसाद के जिन्न को भी कब्जे में ले लिया।ड्ढr लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद राजनीतिक हलकों में यह कहा जाने लगा है कि फिलहाल लालू प्रसाद सत्ता से बेदखल हो गये हैं।ड्ढr ड्ढr लालू प्रसाद भले अपनी बातों को मजाक के रूप में कहते हों लेकिन उनकी पुरानी बातों को याद करने से लगता है कि इसका आभास उन्हें बहुत पहले ही था। तभी तो वर्ष 1े विधान सभा चुनाव में जब नीतीश कुमार ने उन्हें चुनौती दी थी तब उन्होंने कहा था कि ‘अभी तो पांच ही वर्ष हुए हैं उन्हे तो बीस वर्ष तक राज करना है। राजद मूंज है इसे उखाड़ने की कोशिश करने वालों के हाथ लहूलुहान हो जाएंगे।’ दस मार्च 10 को पहली बार उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और पंद्रह वर्षों तक शासन करने के बाद बिहार की सत्ता उनके हाथ से फिसल गई। 24 नवम्बर 2005 को नीतीश कुमार उनकी कुर्सी पर काबिज हो गये। लेकिन लालू प्रसाद के ‘राज’ का अंत नहीं हुआ। वे केन्द्र में मंत्री बन गये और पांच वर्ष तक वहां भी राज करते रहे। इस प्रकार किसी न किसी रूप में वे बीस वर्ष तक राज करते रहे। इसी तरह नीतीश कुमार ने भी तब लालू प्रसाद का जवाब देते हुए कहा था कि ‘उनकी जिन्न की ओझाई हम जरूर करंगे। मूंज को हम हाथ नहीं लगायेंगे बल्कि उसकी जड़ में मठ्ठा डालकर उसे समाप्त करंगे।’ नीतीश कुमार ने भी अपनी बातों को साकार कर दिखाया। उन्होंने मूंज की जड़ में मठ्ठा भी डाला और लालू के जिन्न पर भी कब्जा जमा लिया। आज उसी जिन्न (अतिपिछड़ी और महादलित) के सहार उन्होंने लोकसभा चुनाव में राजद को कड़ी शिकस्त दी है।

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