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झारखंड में गरीबों के 80 फीसदी मुकदमे लंबित

देश के चीफ जस्टिस केाी बालाकृष्णन ने कहा कि झारखंड में सिविल केस में कमी आयी है, लेकिन क्रिमिनल केस बढ़ रहे हैं। गरीबों के 80 केस लंबित हैं। आपराधिक मामलों की संख्या में इजाफा होना गंभीर है। इसके कारणों पर न्यायपालिका, बार एवं अन्य एजेंसियां विचार करं। वह 17 मई को रांची में झारखंड ज्यूडिशियल एकेडेमी भवन की आधार शिला रखने के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे।उन्होंने कहा कि देश का अभियोजन सिस्टम कमजोर है। इससे जुड़ी एजेंसियों को समीक्षा करने की जरूरत है। यही कारण है ज्यूडिशियल एकेडेमी के माध्यम से ट्रेनिंग और रिफ्रेसर्स कोर्स चलाया जा रहा है। जजों को भी ट्रेनिंग की जरूरत है। यह सिर्फ जजमेंट लिखने के लिए ही नहीं, केस समझने के लिए भी है। महिला अधिकार, घरलू हिंसा, बाल अपराध तथा अन्य सामाजिक मूल्यों को भी जानने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अदालतों में मामलों की लंबित संख्या में वृद्धि हो रही है। इसके पीछे जजों की कमी, इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं होना और ज्यूडिश्यिल सिस्टम का परिपूर्ण नहीं होना प्रमुख कारण हैं। समारोह को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसबी सिन्हा, जस्टिस वीएस सिरपुरकर, जस्टिस मार्कण्डेय काटू, जस्टिस अल्तमस कबीर, जस्टिस मुकुंदकम शर्मा, झारखंड की चीफ जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्र एवं जस्टिस एमवाइ इकबाल ने भी संबोधित किया। समारोह में गोहाटी हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस जे चेलामेश्वर, पटना के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश शिव कीर्ति सिंह सहित कई जज, रिटायर जज, राज्यपाल के तीनों सलाहकार एवं अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। पेज 5 भी देखें

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