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मुकदमे घटायें बार और अदालतें

चीफ जस्टिस केाी बालाकृष्णन ने कहा कि देश की विभिन्न अदालतों में दो करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं। सबसे अधिक निचली अदालतों में 87 प्रतिशत मामले लंबित हैं। इनमें 62 फीसदी मामले मजिस्ट्रेट कोर्ट में लंबित हैं। रांची में एक समारोह में उन्होंने कहा कि मामलों की संख्या कम करने के लिए ट्रेनिंग की जरूरत है। न्यायपालिका में आनेवाले बदलाव और तेजी से बदल रहे परिदृश्य को देखते हुए जिला जजों के लिए ट्रेनिंग अनिवार्य हो गयी है।ड्ढr जस्टिस बालाकृष्णन ने सहायक लोक अभियोजकों व लोक अभियोजकों को भी ट्रेनिंग देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इन्हें भी ज्यूडिशियल एकेडेमी में ट्रेनिंग दी जा सकती है। इसके अलावा स्टेट एजेंसी का भी अपना ट्रेनिंग सेंटर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला अत्याचार, बाल अपराध और एचआइवी के मामले में काफी कुछ जानने की जरूरत है। केस डील करने के लिए सिस्टम जाने बगैर मामलों के निष्पादन में तेजी नहीं आयेगी।ड्ढr पारंपरिक तरीके से हुआ स्वागतड्ढr चीफ जस्टिस केाी बालाकृष्णन का धुर्वा पहुंचने पर झारखंड की परंपरा के अनुसार स्वागत किया गया। तिलक लगाया गया और आदिवासी नृत्य के साथ उन्हें मंच तक लाया गया। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। रांची एयरपोर्ट पर भी जप वन के जवानों ने उन्हें सलामी दी।ड्ढr जस्टिस इकबाल की प्रशंसाड्ढr समारोह में हाइकोर्ट के जस्टिस एमवाइ इकबाल की सभी ने प्रशंसा की। जस्टिस इकबाल के प्रयास से ही एकेडेमी बन रहा है। यहां हॉस्टल, लाइब्रेरी की भी व्यवस्था होगी। एकेडेमी का अपना गेस्ट हाउस व पूर्णत: कंप्यूटरीकृत होगा। करीब छह एकड़ जमीन पर इसका निर्माण हो रहा है।ड्ढr 13 जज एक साथ रांची आयेड्ढr पहली बार सुप्रीम कोर्ट समेत अन्य राज्यों के 13 जज एक साथ रांची आये। सभी झारखंड ज्यूडिशियल एकेडेमी के नये भवन के शिलान्यास पर आये थे। इनमें चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस एसबी सिन्हा, जस्टिस अल्तमस कबीर, जस्टिस मरकडेय काटू, वीएस सिरपुरकर, गौहाटी हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस जे चेलामेश्वर, पटना हाइकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस शिवकीर्ति सिंह, सुप्रीम कोर्ट इ कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस पीकेआइ बालसुब्रह्मण्यम, राजस्थान हाइकोर्ट के जस्टिस केएस राठौर, पटना हाइकोर्ट की जस्टिस मृदुला मिश्र, केरल हाइकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस यूपी सिंह, राजस्थान हाइकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एसएन झा, राजस्थान के पूर्व चीफ जस्टिस नारायण राय, राजस्थान के ही पूर्व चीफ जस्टिस एमआर कैला प्रमुख थे।ड्ढr जजों को सम्मानित कियाड्ढr झारखंड राज्य बार कौंसिल ने देश के चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के अन्य जजों को सम्मानित किया। कौंसिल के चेयरमैन पीसी त्रिपाठी ने चीफ जस्टिस को बुके देकर सम्मानित किया। कौंसिल के सदस्यों ने अन्य जजों, झारखंड की चीफ जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्र और जस्टिस एमवाइ इकबाल को सम्मानित किया।ड्ढr राज्यपाल से मिले चीफ जस्टिसड्ढr राज्यपाल सैयद सिब्ते राी से देश के चीफ जस्टिस केाी बालाकृष्णन, सुप्रीम कोर्ट जस्टिस एसबी सिन्हा, जस्टिस मरकडेय काटू, जस्टिस वीएस सिरपुरकर, सुप्रीम कोर्ट इ कमेटी के चेयरमैन जस्टिस पीकेआइ बालसुब्रह्मण्यम, पटना हाइकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस शिव कीर्ति सिंह, जस्टिस मृदुला मिश्र, गौहाटी हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस ने मुलाकात की। यह एक शिष्टाचार मुलाकात थी। राज्यपाल ने सभी को स्मृति चिन्ह भी भेंट किया। इस अवसर पर हाइकोर्ट की चीफ जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्र, जस्टिस एमवाइ इकबाल, जस्टिस अमरश्वर सहाय, जस्टिस आरके मेरठिया भी उपस्थित थे।ड्ढr स्किल बढ़ाने में मददगार होगी एकेडेमी : जस्टिस मिशड्र्ढr झारखंड हाइकोर्ट की चीफ जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्र ने कहा कि न्यायिक क्षेत्र में बदलाव आ रहे हैं। इन्हें जानने के लिए ट्रेनिंग की जरूरत है। झारखंड ज्यूडिशियल एकेडेमी अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। एकेडेमी से न्यायिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को लाभ होगा।ड्ढr पीपी, एपीपी को भी ट्रेनिंग मिले : जस्टिस सिरपुरकरड्ढr सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस वीएस सिरपुरकर ने कहा कि जजों के साथ पब्लिक प्रोसिक्यूटर (पीपी) और एपीपी को भी ट्रेनिंग दिये जाने की आवश्यकता है। मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए सभी को अत्याधुनिक जानकारी से लैस होना बहुत जरूरी हो गया है।ड्ढr जेजेबी पर ध्यान देने की जरूरत : जस्टिस कबीरड्ढr सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अल्तमस कबीर ने कहा कि बाल अपराध पर काफी कुछ सीखने की जरूरत है। हम दोषी तो मानते हैं, लेकिन सजा को लेकर संशय होता है। इस कारण इस बार में काफी कुछ जानने की जरूरत है। ज्यूडिशियल एकेडेमी में इस पर ध्यान दिया जा रहा है।ड्ढr ग्लोबल चेंज के लिए ट्रेनिंग जरूरी : जस्टिस शर्माड्ढr सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मुकुंदकम शर्मा ने कहा कि आज दृश्य बदल गया है। निजीकरण, ग्लोबल सिनारियो के कारण नयी तकनीक की जरूरत है। यह टेक्िनक और टूल्स क्या होंगे, इसके लिए ज्यूडिशियल एकेडेमी मददगार होगा। एकेडेमी इन जरूरतों को पूरा करगा।ं

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