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दो टूक

अमृत-कलश के लिए देवासुर संग्राम की कथा हमने सुनी है। पात्रता होने के बावजूद देवों को अमृत -कलश के लिए कितना संघर्ष करना पड़ा था। असुरों ने अपनी प्रकृति के अनुसार क्या-क्या छल प्रपंच नहीं किये। पर भारत के वोटरों ने तो अद्भुत करिश्मा कर दिखाया। उनकी इस बार की शैली पर नजर डालिए। एक तो इतनी कम संख्या में उतर कि कोई अनुमान लगाना मुश्किल हो गया कि परिणाम क्या होगा। लेकिन कश्मीर से कन्या कुमारी तक और पश्चिम से पूवरेत्तर तक अमृत कलश के लिए संघर्ष कर रहे असुरों का सफाया कर उन्होंने यह जता दिया कि असुरों के सफाये के लिए वे आधे ही काफी हैं। फिर ‘अमृत-कलश’ जिन्हें पात्रता थी उन्हें सौंप दिया। जनता जब जग जाये तब‘देवों’ की राह भी कितनी निष्कंटक हो जाती है! इन नवजागृतों क ो हमारा सलाम!

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