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झारखंड हल्का, दिल्ली भारी

झारखंड के पांच विधायक संसद की शोभा बढ़ायेंगे। राज्य में जितने भी मुख्यमंत्री हुए हैं, सभी 15वीं लोकसभा में बैठेंगे। इस लोकसभा चुनाव में चारों पूर्व सीएम समेत पांच विधायक विजयी हुए हैं। वैसे तो अभी विधानसभा निलंबित है, लेकिन अस्तित्व में आने पर झारखंड विधानसभा में इन कद्दावर नेताओं की कमी खलेगी। इंदरसिंह नामधारी और पीएन सिंह से उम्मीद की जा रही है कि वे अपनी राजनीतिक समझदारी और संसदीय अनुभव से संसद में झारखंड की वजनदार उपस्थिति दर्ज करायेंगे। दल के भीतर और बाहर प्रदेश की राजनीति में आमने-सामने रहने और समय-समय पर राजनीतिक कोण बनाने वाले इन तमाम नेताओं का दिल्ली पहुंचना एक बड़ा संयोग बना है। झारखंड के कद्दावर नेताओं का जो समूह दिल्ली पहुंच रहा है, उससे लोकसभा में झारखंड की आवाज ऊंची होगी, ऐसी अपेक्षा की जा रही है। झारखंड भाजपा की प्रथम पंक्ित के अधिकांश नेताओं को संसद पहुंच कर दिल्ली की राजनीति के इर्द-गिर्द अपनी गतिविधि बढ़ाने का अवसर मिला है। भाजपा के यशवंत सिन्हा पहले से ही राष्ट्रीय राजनीति में है। इस बार उनकी कतार में अजरुन मुंडा, पीएन सिंह और फिर कड़िया मुंडा भी जुड़ेंगे। भाजपा से नदजीकी संबंध रखनेवाले इंदरसिंह नामधारी भी सुर में सुर मिलाने की स्थिति में होंगे। जहां तक झारखंड की राजनीति और विकास को दिल्ली में स्थान दिलाने की बात है, तो राज्य के चार पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरन, मधु कोड़ा, अजरुन मुंडा और बाबूलाल मरांडी एक साथ संसदमें रहेंगे।

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