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राहुल के आगे माया का सोशल इंजीनियरिंग फेल

सोशल इंजीनियरिंग के जरिए उत्तर प्रदेश में जीत का परचम लहराने वाली मायावती की सोशल इंजीनियरिंग इस बार लोकसभा चुनाव में नहीं चल पाई। इस बार मायावती को ठाकुर, ब्राह्मण और मुस्लिमों के बहुत कम वोट पड़े। 2007 में विधानसभा में चुनाव में जबरदस्त जीत के बाद मायावती इस बार भी आशा कर रही थी कि दलित वोट के साथ मुस्लिम सुमदाय और ब्राह्मण के वोट भी मिलेंगे। पिछले चुनावों की ही तरह बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इस बार ब्राह्मण वर्ग से 20 लोगों को, ठाकुर में से 8 लोगों को और मुस्लिमों में 14 लोगों को सीट दी। इनमें से मात्र 5 ब्राह्मण, 4 ठाकुर और चार मुस्लिम ही जीत दर्ज कर पाए। इस बार मायावती का सोशल इंजीनियरिंग का दांव नहीं चला और उत्तर प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को 21 सीट देकर उनके समकक्ष खड़ा कर दिया। पिछले विधानसभा चुनाव में मायावती ने 80 ब्राह्मणों को सीट दी थी, जिसमें से 42 प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। इसी तरह से ठाकुरों और मुस्लिमों ने भी कई सीटें जीतकर मायावती के सोशल इंजीनियरिंग को सफल बना दिया था, लेकिन इस बार सोशल इंजीनियरिंग पर राहुल गांधी के गांव-गांव जाकर लोगों के घर रहना भारी पड़ा।

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