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वाम एकता का दिखेगा असर : दीपंकर

भाकपा माले ने स्वीकार किया है कि इस बार उसकी कतारों में भी मतदान को लेकर उत्साह नहीं था। यही कारण है कि इस बार पार्टी को मिले वोट में लगभग आधा प्रतिशत की गिरावट हुई है। चुनाव परिणामों की समीक्षा के लिए पार्टी ने 24, 25 और 26 मई को दिल्ली में केन्द्रीय कमेटी की बैठक बुलाई है। पार्टी ने माना है कि इस बार बिहार में वामपंथी दलों का एक साथ चुनाव मैदान में उतरना उपलब्धि रही है और इसका असर अगले विधानसभा चुनाव में दिखाई पड़ेगा।ड्ढr ड्ढr माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने सोमवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बिहार के मतदाताओं की चिंता राजद के फिर वापस लौटने के खतर को लेकर थी और इसी का फायदा नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए ने उठाया। नीतीश कुमार के दावे के अनुसार अगर उनके काम को लेकर लोग मतदान करते तो इसका प्रतिशत बढ़ना चाहिए था। दूसरी तरफ वामपंथियों की एकता को बिहार में अच्छा समर्थन मिला लेकिन यह समर्थन वोट में तब्दील नहीं हो सका। अब माले अन्य वामपंथी दलों के साथ मिलकर जनता के मुद्दों पर संघर्ष करगा। राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की पुनर्वापसी के संकेत मिले हैं। बिखर हुए गठाोड़ के बावजूद कांग्रेस बहुमत के करीब पहुंच गई है। देश की जनता ने एनडीए को खारिा कर दिया है और तथाकथित तीसरा मोर्चा फिसड्डी साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को मिले समर्थन का यह मतलब कतई नहीं है कि उसकी कारपोरटपरस्त आर्थिक नीतियों और अमेरिकापरस्त विदेश नीति को भी जनता ने समर्थन दिया है। दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में सिंगूर और नंदीग्राम में उभर विद्रोह के कारण वाम मोर्चे को नुकसान उठाना पड़ा। वाम मोर्चे के प्रति आक्रोश का फायदा तृणमूल कांग्रेस को मिला।

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