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नेताओं पर पहले भी लगा रासुका

हत्या, हत्या के प्रयास, गैंगस्टर अधिनियम के घेर में आने के बावजूद राजनीति की दुनिया गुलजार करने वालों की संख्या सैकड़ों में है। उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के शिकंो में फँसने वाले राजनेताओं की संख्या भी कम नहीं। पीलीभीत से भाजपा प्रत्याशी वरुण गांधी इस फेहरिस्त के सबसे नए सदस्य हैं। वरुण गांधी से पहले प्रदेश सरकार ने इंजीनियर हत्याकांड के आरोपी बसपा विधायक शेखर तिवारी और एक अन्य मामले में हमीरपुर से सपा प्रत्याशी अशोक चंदेल पर रासुका तामील कराया। अदालत ने अशोक पर लगा रासुका खारिा कर दिया है। इन सियासी व्यक्ितयों के अलावा अपराध की दुनिया में सक्रिय दो दर्जन से अधिक लोगों पर रासुका तामील की गई है।ड्ढr पूर्व सांसद रमाकान्त यादव, उमाकान्त यादव के खिलाफ दर्ज मुकदमों की संख्या लंबी है, लेकिन स्टेट गेस्ट हाउस काण्ड में शामिल रहने पर आरोपित हुए तो रासुका लगा। विधायक रघुराज प्रताप सिंह, सपा सांसद अक्षय प्रताप सिंह पर कई मुकदमे दर्ज थे, मगर पोटा के दायर में भी आए। श्रम मंत्री बादशाह सिंह के खिलाफ विपरीत धारा की राजनीति करने पर ही रासुका तामील हुआ लेकिन जाहिरा आधार था भानुमती हत्याकाण्ड। हमीरपुर से सपा प्रत्याशी अशोक चंदेल पर कुछ माह पहले ही एनएसए तामील हुआ, इस पर उन्हें अदालत से राहत मिली। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को मार डालने के आरोपित बसपा विधायक शेखर तिवारी पर भी रासुका तामील हुई।ड्ढr वाराणसी से बसपा प्रत्याशी मुख्तार अंसारी, बसपा नेता सुशील कुमार सिंह, इसौली विधानसभा क्षेत्र के निवासी कृष्ण कुमार उर्फ कक्कू पाण्डेय, पवन पाण्डेय, मदन भैय्या के खिलाफ भी एनएसए की कार्रवाई हो चुकी है। पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी भी टाडा, एनएसए की कार्रवाई की जद में आ चुके हैं। भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा से चुनाव लड़ चुके तकरीबन दो दर्जन ऐसे नेता भी हैं, जिनके खिलाफ गैंगस्टर, गुण्डा एक्ट की कार्रवाइयाँ हो चुकी हैं।ड्ढr

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