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स्टेम सेल प्रत्यारोपण से पैराप्लीजिया का इलाज

चिकित्सा विश्वविद्यालय के डॉक्टरों ने राज्य में पहली बार पैराप्लीजिया के इलाज के लिए स्टेम सेल प्रत्यारोपण का सहारा लिया है। चिविवि के हड्डी रोग विभाग में डॉक्टरों की टीम ने स्टेम सेल को रीढ़ की हड्डी में प्रत्यारोपित किया। इस सर्जरी में तीन घण्टे से अधिक का समय लगा।ड्ढr स्टेम सेल जिसे मदर सेल भी कहा जाता है, मैं यह क्षमता होती है कि वह शरीर के किसी भी हिस्से के क्षतिग्रस्त सेल की जगह नए सेल का निर्माण कर दे। स्टेम सेल के अधिकतम इस्तेमाल पर पीजीआई समेत कई अन्य अस्पतालों में शोध भी चल रहा है। इसी कड़ी में चिविवि के हड्डी रोग विभाग में पैराप्लीजिया के मरीा पर स्टेम सेल प्रत्यारोपण किया गया। हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जीके सिंह व डॉ. आरएन श्रीवास्तव के अलावा ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन की विशेषज्ञ डॉ. तूलिका चंद्रा ने सर्जरी को अंजाम दिया। बोन मेरो से स्टेम सेल निकालकर स्पाइनल कार्ड में इसे प्रत्यारोपित किया गया। डॉ. जीके सिंह का कहना है कि पैराप्लीजिया में स्पाइनल कार्ड अंदर की नसों को दबाता है जिससे कई नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इस वजह से शरीर में दर्द होता है और कमर के नीचे का हिस्सा काम करना बंद कर देता है। डॉक्टरों को उम्मीद है कि इस मरीा में स्टेम सेल प्रत्यारोपण से क्षतिग्रस्त नसें सही हो जाएँगी। लेकिन लाभ की स्थिति की पूरी जानकारी कुछ समय बाद ही हो पाएगी।

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  • Web Title: स्टेम सेल प्रत्यारोपण से पैराप्लीजिया का इलाज