अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मुलायम को चुनना होगा दिल्ली-यूपी में एक

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिल्ली की सियासत करंगे या यूपी की? लोकसभा चुनाव के बाद यह भी सवाल खड़ा हो गया है। मुलायम मैनपुरी से सांसद बने हैं। विधायक वे पहले से हैं। विधानसभा में वे नेता प्रतिपक्ष हैं। उन्हें एमपी या एमएलए में कोई एक पद छोड़ना होगा। नियमों के मुताबिक उन्हें चौदह दिन के भीतर किसी एक सदन की सदस्यता छोड़नी होगी। मुलायम 2004 में भी सांसद चुने गए थे लेकिन उन्होंने यूपी की सियासत को तवज्जो देते हुए लोकसभा से इस्तीफा दिया था। खुद मुलायम ने अभी अंतिम फैसला नहीं किया है। बुधवार को यह पूछने पर उन्होंने हिन्दुस्तान से कहा-अभी तय नहीं किया है। पार्टी नेताओं के साथ बात कर तय करंगे। मुलायम जरूर अभी दिल्ली और यूपी के विकल्प तौल रहे हैं लेकिन पार्टी का एक बड़ा धड़ा चाहता है कि वे लोकसभा की सदस्यता ही रखें।ड्ढr इसके पीछे जो तर्क दिए जा रहे हैं उनमें अहम यह कि लोकसभा के भीतर सपा उनके नेतृत्व में ज्यादा दमदारी से अपनी आवाज रखेगी। गए पाँच साल में तीन दर्जन लोकसभा सदस्यों के बावजूद पार्टी लोकसभा में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति नहीं दर्ज करा पाई। इसके अलावा दिल्ली की सियासत में सपा की प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए भी कई नेता मुलायम की दिल्ली में मौजूदगी को जरूरी मान रहे हैं। कांग्रेस से भविष्य के रिश्ते और यूपी की मुख्य प्रतिद्वंद्वी बसपा को कांग्रेस से दूर रखने में भी राष्ट्रीय राजनीति में उनकी मौजूदगी सपा के लिए फायदेमंद हो सकती है। सपा के कुछ नेताओं का मानना है कि लोकसभा चुनावों में बसपा की ताकत कमजोर हुई है लिहाजा विधानसभा में उसके मुकाबिल अब मुलायम खुद न भी हों तो चलेगा।ड्ढr वैसे, मुलायम अगर राष्ट्रीय राजनीति में गए तो विधानसभा में उनकी जगह लेने वाले नेता का नाम तय करना भी श्री यादव के लिए आसान नहीं होगा। शिवपाल सिंह यादव या अम्बिका चौधरी विकल्प हो सकते हैं। आजम खाँ ने पार्टी के खिलाफ जसा अभियान चलाया उसमें उनके नाम पर विचार मुश्किल है। मुलायम के राष्ट्रीय राजनीति में जाने से पहले यूपी में अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी के पहलू को भी पार्टी ध्यान में रखेगी। मुलायम के दिल्ली या यूपी में किसी एक विकल्प को चुनने के साथ उनके संसदीय क्षेत्र मैनपुरी और विधानसभा क्षेत्र भरथना में उपचुनाव का मसला भी जुड़ा है। उपचुनाव में मैनपुरी या भरथना सपा के कब्जे में रखना पार्टी के लिए चुनौती होगी। यही मुद्दा अखिलेश यादव की झोली में आईं कन्नौज और फिरोाबाद के मामले में भी है। पूछने पर अखिलेश ने कहा-अभी तय नहीं किया है कौन सी सीट छोड़ेंगे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: मुलायम को चुनना होगा दिल्ली-यूपी में एक