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तमिलों का पुनर्वास साल के आखिर तक: श्रीलंका

श्रीलंका सरकार को यकीन है कि लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के साथ संघर्ष की वजह से विस्थापित हुए 250,000 तमिलों का पुनर्वास इस साल के आखिर तक हो जाएगा और वे नये सिरे से जिंदगी शुरु कर सकेंगे। यह बात श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के वरिष्ठ सलाहकार एवं भाई बासिल राजपक्षे ने शुक्रवार को कही। उन्होंने कहा कि श्रीलंका सरकार के पास बड़े पैमाने पर पुनर्वास करने का अनुभव और योग्यता है। उन्होंने कहा कि उनका देश सुनामी के बाद ऐसा कर चुका है। उन्होंने कहा किलिनोच्ची और मुइतिवू के तमिल जहां 180 दिनों में अपने घरों को लौट सकेंगे वहीं अन्य सभी विस्थापित भी 31 दिसंबर 200तक अपने घर पहुंच जाएंगे। यह पूछने पर कि क्या यह आंकड़े व्यावहारिक हैं, राजपक्षे ने कहा कि पूर्वी प्रांत में वर्ष 2007 में सेना के हाथों लिट्टे के पराजित होने के बाद सरकार इतनी ही तादाद में विस्थापितों को पुनर्वास कर चुकी है। राजपक्षे ने कहा कि हमने करीब 40,000 मुस्लिमों को रिकॉर्ड 44 दिनों की अवधि में मुटुर में बसा दिया और बट्टिकलोवा में हमने तीन महीनों में 60,000 लोगों का पुनर्वास कर दिया। उन्होंने कहा कि जब पूर्व में लोगों ने अपने घरों से पलायन किया था वहां बसें, अच्छी सड़कें बिजली,स्कूल नहीं थे। लेकिन जब वे लौटे वहां ये सब कुछ था। उन्हें पूर्वी प्रांत का बेहतरीन स्कूल मिला। पुनर्वास और पुनर्निर्माण के मामले में विश्व में हमारा रिकार्ड बहुत ही अच्छा है। दिसंबर 2008 में सैन्य अभियान की वजह से लिट्टे के पीछे हटना शुरू करने के बाद बहुत से लोगों ने भी वहां से हटना शुरू कर दिया। लिट्टे के कब्जे वाले इलाकों से सभी नागरिकों को हटाने के बाद ही सेना लिट्टे का खात्मा कर सकी। विस्थापित लोग इस समय शिविरों में रह रहे हैं। लिट्टे के कट्टर लड़ाकों को छोड़कर अन्य सभी आने वाले सप्ताहों और महीनों में अपने घरों को लौट जाएंगे। राजपक्षे ने यह बात राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम.के.नारायणन और विदेश सचिव शिकंर मेनन से मुलाकात के एक दिन बाद कही। लिट्टे की ओर से बरसों से छिड़ी जंग की वजह से इस इलाके की ख्ेाती, मकान, स्कूल, सरकारी इमारतें और यहां तक कि अस्पताल भी तबाह हो गए थे। राजपक्षे ने सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर पुनर्वास का वादा किया ताकि लोगों को वापस लौटने पर नई सड़कें, अस्पताल, स्कूल, पानी, बिजली आपूर्ति मिल सके। राजपक्षे ने कहा कि उत्तर की चुनौतियां अलग है। यहां बारूदी सुंरगें बड़ी तादाद में हैं उन्हें साफ करना मुख्य चिंता है। अपनी सेना के अलावा हम भारत सरकार के आभारी है जो इन्हें साफ करने में हमारी मदद कर रही है। उसने कुछ और दल ोजने पर सहमति व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वैसे तो कुछ स्वयंसेवी संगठन भी बारूदी सुरंगे साफ करने में मदद कर रहे हैं लेकिन उनकी गुणवत्ता श्रीलंका सेना और भारतीय दलों जसी नहीं है।

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