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बिलकिस बानो कांड में 13 दोषी, सात बरी

ेंद्रीय जांच ब्यूरो की विशेष अदालत ने गुजरात दंगों के दौरान हुए बिलकिस बानो मामले में फैसला सुनाते हुए शुक्रवार को एक पुलिस अधिकारी समेत 13 को दोषी करार दिया जबकि सात आरोपियों को बरी कर दिया। दोषियों को सजा हालांकि 21 जनवरी को सुनाई जाएगी। उल्लेखनीय है कि इस मामले की सुनवाई गुजरात के बजाय महाराष्ट्र में उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार की गई थी। वर्ष 2002 में गोधरा कांड के बाद गुजरात में भड़के दंगों के दौरान दंगाइयों ने बिलकिस बानो के 14 परिजनों को मार दिया था और उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया था। बिलकिस उस समय छह महीने के गर्भ से थीं। घटना 3 मार्च 2002 को मध्य गुजरात में दाहोड़ जिले के राधनपुर गांव में घटी थी। दंगाइयों ने उनके जिन परिजनों को मार डाला था उनमें बिलकिस की मां दो बहनें और एक तीन वर्षीय बच्चा शामिल था। सीबीआइ ने इस प्रकरण में 20 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। एक आरोपी की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। आरोपियों में छह पुलिसकर्मी और एक डॉक्टर दंपत्ति शामिल था। पुलिसकर्मियों पर जांच में कोताही बरतने और सबूतों को नष्ट करने तथा डॉक्टर दंपत्ति पर सबूतों से छेड़छाड़ करने के आरोप थे। गुजरात दंगों का यह पहला प्रकरण था जिसमें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे और यह प्रकरण वडोदरा के बेस्ट बेकरी कांड के बाद दूसरा प्रकरण था जिसकी सुनवाई गुजरात से बाहर करने का निर्देश उच्चतम न्यायालय ने दिया था। सीबीआई ने मारे गए लोगों के कंकाल कब्रें खोदकर निकाले थे जो पुलिस ने नमक डालकर दफनाए थे ताकि शव जल्दी नष्ट हो जाएं।

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