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लावारिस सम्पत्तियों पर बिल्डरों की निगाहें

सालों से अपने स्वामियों की बेरुखी को झेल रहे मकानों और खाली पड़े प्लाटों पर अब निगाहें हैं बिल्डरों की। अगर ये किसी पॉश या खास इलाके में हैं, तो समझ लें कि बिल्डर बिरादरी दिन-रात एक कर देती है ताकि उसके स्वामी के संबंध में सूचना मिल जाए। उससे सम्पर्क करके उससे मकान या प्लाट को बेचने का आग्रह किया जा सके और एक बार उस सम्पत्ति को लेने के बाद वहां पर फ्लैट या फ्लोर बेचकर मोटा पैसा कमा लिया जाए। रीयल एस्टेट सेक्टर के जानकार कहते हैं कि राजधानी की ही अगर बात हो, तो यहां की पॉश और दूसरी तमाम उम्दा कालोनियों में ऐसी सम्पत्तियों की कोई कमी नहीं है जिसके स्वामियों ने लम्बे समय तक उन्हें देखा तक नहीं है। वे वहां पर रहते तक नहीं। संपत्ति का दाम करोड़ों रुपये में पहुंच गया है, तो भी उन्हें उसे देखने या बेचने तक की फुर्सत तक नहीं है। इस क्रम में जानकार अमिताभ बच्चन के गुलमोहर पार्क स्थित बंगले और अपने जमाने के चोटी के उपन्यासकार गुलशन नंदा के लाजपत नगर स्थित मकान का उल्लेख अवश्य करते हैं। रीयल एस्टेट सेक्टर की सलाहकार एजंेसी डीजीएस रीयलटर्स के विक विश्वनाथ ने कहा कि अगर एक अरसे से खाली पड़े मकानों में कोई भी नहीं रह रहा हो, तो उसे बिल्डर खरीदना चाहेंगे ही। वे उसे लेकर वहां पर फ्लैट और फ्लोर बनाकर बेच देते हैं। सूत्रों का कहना है कि देश के पूर्व राष्ट्रपति वीवी गिरी का एक एक मकान भी पूर्वी दिल्ली की प्रमुख कालोनी में लम्बे समय से लावारिस हालत में पड़ा। मकान के बाहर पूर्व राष्ट्रपति का नाम भी लिखा हुआ है। प्रमुख रीयल एस्टेट कम्पनी आदित्य एसोसिएटेस के निदेशक आशीष अग्रवाल ने माना कि बिल्डर कायदे की जगह पर लावारिस मकानों और प्लाटों को उनके स्वामियों से खरीदकर उसे अपने स्तर पर विकसित करना चाहते हैं। वे कहते हैं कि कोई मकान या दूसरी अचल सम्पत्ति के लावारिस होने की दो-तीन वजहें रहती हैं। जैसे कि उसे स्वामियों का संसार में न रहना और उनके बच्चों का किसी अन्य देश में जाकर बस जाना। ऐसे भी होता है उस पर मालिकाना हक को लेकर कई लोगों में लम्बे समय तक विवाद चल रहा होता है। एक बिल्डर ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर माना कि वे इस कोशिश में रहते हैं किआवासीय या कॉमर्शियल सम्पत्ति लावारिस हालत में पड़ी होती है, तो वे कोशिश करते हैं कि उसके स्वामी से मिलकर उसे खरीद लिया जाए।

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  • Web Title: लावारिस सम्पत्तियों पर बिल्डरों की निगाहें