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द. दिल्ली में ऊपर से ही जाएगी मेट्रो

दक्षिणी दिल्ली के बेहद घने और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुल के बजाय भूमिगत मेट्रो मार्ग के लिए अभियान चला रहीं स्थानीय रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा, जब प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता वाले मंत्री समूह ने जंगपुरा से आगे तक के मेट्रो कोरिडोर को पुल पर ही बनाने का फैसला किया। उनका मानना है कि इससे लागत में कमी के साथ ही निर्माण कार्य जल्द होगा। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री जयपाल रेड्डी के करीबी सूत्रों ने बताया कि लोगों की इन शिकायतों पर बैठक में विचार किया गया कि जमीन पर कोरिडोर बनाने से काफी शोरगुल और ध्वनि प्रदूषण होगा। इसे ध्यान में रखकर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) से कहा गया है कि वे इसमें कमी लाने के लिए कदम उठाएं। मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले पर मंत्री समूह का फैसला 5 फरवरी को कोर्ट में अगली सुनवाई के दौरान रखा जाएगा। लोगों की मांग थी कि केंद्रीय सचिवालय से बदरपुर तक के मेट्रो कोरिडोर को नेहरु प्लेस तक भूमिगत रखा जाए। उनकी याचिका दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित है। सम्पर्क करने पर याचिकाकर्ताआें की आेर से पैरवी कर रहे राजीव काकड़िया ने कहा कि महज 15 दिनों के खेलों (कॉमनवेल्थ) की वेदी पर निवासियों के हितों की बलि चढ़ाई जा रही है। अब अदालत ही हमारे लिए अंतिम आशा है। भले ही मंत्री समूह के फैसले में विलम्ब हुआ हो लेकिन इससे डीएमआरसी की योजना प्रभावित नहीं हुई। उसने खम्भों के निर्माण का काम नवंबर से ही शुरू कर दिया था। इससे पहले ऐसोसिएशनों ने मंत्री समूह को पत्र लिखकर डीएमआरसी के इस दावे को चुनौती दी थी कि जंगपुरा से नेहरू प्लेस तक भूमिगत कोरिडोर के निर्माण पर 850 करोड़ की लागत आएगी। उनकी दलील थी कि जब केंद्रीय सचिवालय से जंगपुरा तक के 6.1 किमी के भूमिगत गलियारे पर 8रोड़ रुपए का खर्चा आएगा, तो 4.4 किमी अतिरिक्त गलियारे पर 850 करोड़ रुपए की लागत संदेहास्पद है। उन्होंने यह भी ध्यान दिलाया था कि खुद मेट्रो की वेबसाइट कहती है कि जमीन पर मेट्रो मार्ग काफी ज्यादा जगह घेरता है और इससे शहर की भावी विस्तार योजनाआें पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

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