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विधानसभा सचिवालय की बहालियों में अब आरक्षण

विधानसभा और विधान परिषद में अब रेवड़ी की तरह नहीं बंट सकेंगी नौकरियां। गोलमाल पर ब्रेक लगाने के लिए सरकार ने विधानसभा सचिवालय में होने वाली बहालियों पर वर्ष 2000 के प्रभाव से ही आरक्षण नियमों को लागू कर दिया है। जल्द ही यही प्रावधान विधान परिषद सचिवालय पर भी लागू हो जाएगा। शनिवार को 1, अणे मार्ग में हुई बैठक में कैबिनेट ने विधानसभा सचिवालय की नौकरियों में भी आरक्षण लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। गौरतलब है कि गुलाम सरवर से लेकर जाबिर हुसेन तक के कार्यकाल में विधानसभा और विधान परिषद में हुई बहालियां ‘जी का जंजाल’ बनी रहीं। नियमों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से बहाल हुए सैंकड़ों कर्मचारी जिस तरह काम करते-करते अचानक सड़क पर आ गये, उससे कहीं न कहीं विधानमंडल की गरिमा पर भी सवालिया निशान लगता रहा है। कायदे-कानून ताक पर रखकर मनमाफिक होने वाली बहालियों और गड़बड़ियों को रोकने के लिए लम्बे अरसे से कवायद चल रही थी। आखिरकार संसदीय कार्य विभाग ने विधानसभा सचिवालय (भत्र्ती एवं सेवा शत्त्रे) नियमावली 1में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया। इसके तहत वहां राज्य सेवाओं के समान ही आरक्षण प्रावधान का पूर्णतया पालन किया जायेगा। इसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।ड्ढr ड्ढr सूत्रों के अनुसार ठीक इसी तरह का आरक्षण प्रावधान लागू करने का एक प्रस्ताव विधान परिषद के कार्यकारी सभापति के पास भेजा गया है। उनकी मंजूरी के बाद संसदीय कार्य विभाग पुन: एक प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष रखेगा ताकि विधान परिषद सचिवालय की बहालियों में भी आरक्षण प्रावधान लागू हो जाये। सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि नौकरियों में विधानपरिषद के सभापति और विधानसभाध्यक्ष की पूर्व की भांति नियोक्ता की हैसियत बरकरार रहेगी।ं

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