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बढ़ी है कुंबले की प्रतिष्ठा

भारतीय टीम ने गत ढाई वर्षों से अजेय चल रही ऑस्ट्रेलियाई टीम को जिस तरह यहां तीसरे क्रिकेट टेस्ट मैच में चारों खाने चित करते हुए शानदार विजय हासिल की है उससे आम तौर पर शांत रहने वाले उसके कप्तान अनिल कुंबले की प्रतिष्ठा में चार चांद लग गए हैं। अनुभवी लेग स्पिनर कुंबले ने इसी मैच में 600 विकेटों को आंकड़ा हासिल करके खुद को टेस्ट इतिहास के चंद बेहतरीन गेंदबाजों में शामिल कराने के साथ ही सिडनी प्रकरण से सदमे में आयी टीम इंडिया का कायापलट करते हुए उसे विजयी खेमे में बदलने का प्रेरणादाई नेतृत्व प्रदान किया है। 37 वर्षीय कुंबले भले ही 18 साल से भारतीय टीम की अहम कड़ी बने हुए हैं, लेकिन महज दो महीने पहले ही उन्हें भारतीय टीम की कप्तानी सौंपी गई थी और उन्होंने इन दो महीनों में ही दो ऐसी कामयाबियां हासिल कर ली हैं जो उन्हें एक अलग पहचान देने के लिए काफी हैं। उनकी कप्तानी में ही भारत ने गत महीने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को अपनी जमीन पर हराने का कारनामा 28 साल बाद दोहराया और अब पर्थ में ऑस्ट्रेलिया को मात देने वाली पहली एशियाई टीम बन गई है। खास तौर पर सिडनी टेस्ट के दौरान खराब अंपायरिंग और आफ स्पिनर हरभजन सिंह पर लगे नस्लीय टिप्पणी के आरोप से उठे बवंडर का जिस बखूबी से सामना किया है उसने क्रिकेट जगत में उनके मुरीदों की संख्या में बेशुमार इजाफा कर दिया है। इन विवादों के चलते भारतीय टीम के ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर संकट के बादल मंडराने लगे थे, लेकिन मुश्किल की इस घड़ी में कुंबले न केवल अपनी टीम के साथ चट्टान की तरह खड़े रहे बल्कि अपने दिल की बात रखने से भी नहीं चूके। कुंबले ने सिडनी टेस्ट के दौरान ऑस्ट्रेलियाई टीम की खेल भावना पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा था कि मैच में केवल एक ही टीम सही भावना से खेल रही थी। उनके इस बयान ने 1ी बहुचर्चित बाडीलाइन सीरीज में ऑस्ट्रेलियाई कप्तान बिल वुडफुल के बयान की याद ताजा कर दी जिसमें उन्होंने डगलस जार्डिन की अगुआई वाली अंग्रेज टीम पर खेल भावना के विपरीत खेलने का आरोप लगाया था। लेकिन कुंबले ने विवाद को शांत करने की गरज से पर्थ टेस्ट के पहले विपक्षी कप्तान रिकी पॉन्टिंग से मिलकर हरेक विवादित मुद्दे पर खुलकर चर्चा की जिसका परिणाम यह हुआ कि इस मैच में कोई भी नया विवाद नहीं पैदा हुआ। इसके अलावा कुंबले ने सिडनी टेस्ट के दौरान उन्हें गाली देने वाले आस्ॅट्रेलियाई स्पिनर ब्रैड हॉग की मैच रेफरी से की गई शिकायत को वापस लेकर भी बड़ा दिल दिखाया। इन सभी घटनाआें ने कुंबले को एक मंजे हुए लीडर के रूप में क्रिकेट जगत में स्थापित किया है। उन्होंने कहा, ‘मुश्किल की इस घड़ी में मैंने काफी कुछ सीखा है। ऐसे वक्त में शांत रहना और सही फैसला लेना काफी महत्वपूर्ण होता है। मेरा मानना है कि क्रिकेट अपने आप में किसी भी खिलाड़ी से बड़ा है और जब आप इस बात को ध्यान में रखकर कोई फैसला करते हैं तो आप कभी भी गलत नहीं होंगे।’

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