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बड़े नामों के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं अजय जयराम

पहले राष्ट्रीय चैंपियन चेतन आनंद और अब भारत के नंबर दो खिलाड़ी अरविंद भट्ट। एक ही महीने में दो बड़े शिकार करने के बाद अब अजय जयाराम की नजरें बेशक नंबर एक खिलाड़ी अनूप श्रीधर पर लगी होंगी। लेकिन उनका कहना है-मेरे सामने जो भी खिलाड़ी होगा, उसके खिलाफ मैं ऐसा ही खेलूंगा और जीत के लिए पूरा जोर लगाता रहूंगा। टाटा अकादमी के अजय आज भारतीय बैडमिंटन में सभी बड़े नामों के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। आज भी उनके ताकतवर स्मैशों का अरविंद के पास जवाब नहीं था। अपने इस साल की शुरुआत के बार में अजय ने कहा-बेशक आगाज अच्छा है, उम्मीद है कि अंजाम भी अच्छा ही होगा। सिर्फ सात साल की उम्र से ही हाथ में बैडमिंटन संभालने वाले अजय ने आज 13 साल का सफर कर लिया है और उन्हें उम्मीद है कि ये सफर ऐसे ही जारी रहेगा। पिछले साल फिलिपींस ओपन में उन्होंने विश्व के नंबर दो खिलाड़ी चेंग होंग को, हारने से पहले कड़ी टक्कर दी पर 17 और 1पर मैच हार गए। बेशक इसे वे अपना यादगार मैच मानते हैं। हालांकि उससे पहले 2006 में हांगकांग ओपन में उस वक्त के दुनिया के 12वें नंबर के खिलाड़ी हॉलैंड के एरिक पेंग को शिकस्त दी थी। उसी साल उन्होंने सीनियर ऑल इंडिया रैंकिंग टूर्नामेंट भी जीता था। मूल रूप से दक्षिण भारत के पाल घाट के अजय की पूरी शिक्षा मुंबई में हुई है। 20 साल के अजय फिलहाल बी. कॉम के दूसरे वर्ष में हैं और पूरी तरह से बैडमिंटन पर अपना ध्यान लगाए हुए हैं। अपनी अब तक की सफलता का श्रेय अजय पूरी तरह से अपने माता-पिता को देते हैं। साथ ही अजय का मानना है कि अगर इस खेल में पैसों की कमी न हो तो और अच्छे खिलाड़ी निकल सकते हैं। उन्होंने कहा-हम जितने विदेशी टूर्नामंेटों में खेलेंगे, उतना प्रदर्शन अच्छा होगा। लेकिन भारतीय बैडमिंटन संघ जहां भेज सकता है, वहीं जा सकते हैं। पिछले साल मैं सिर्फ चार टूर्नामेंटों में खेला। अपने पास से पैसा लगा कर नहीं खेल सकते क्योंकि एक पर ही काफी खर्चा हो जाता है। अगर इसमें भी स्पॉन्सर मिलें तो बहुत फायदा होगा। साल में अगर 10-12 विदेशी टूर्नामेंट खेलने का मौका मिले तो बहुत अच्छा रहेगा। कोच के बारे में, एक निष्ठावान शिष्य की तरह, अजय का मानना है कि अपने पास काफी अच्छे कोच हैं। उन्होंने कहा-टाटा अकादमी में प्रकाश और विमल कुमार जैसे कोचों के रहते किसी और की जरूरत नहीं। आखिरकार खेलना तो हमें ही है, वे सिर्फ हमें गाइड करते हैं। और इनसे अच्छा और कौना गाइड करेगा। पिछले साल फिलिपींस ओपन के बाद करीब तीन-चार महीने जॉन्डिस में रहने के कारण अजय की रैंकिंग आज काफी नीच आ गई है, उससे पहले वे पांच नंबर पर थे। इसी बीमारी के कारण ही उन्हें यहां क्वालिफाइंग भी खेलना पड़ा।ड्ढr

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