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25 फरवरी, 2020|10:47|IST

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लोटा सेंसेक्स, लुटे छह खरब

अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंका ने भारत समेत तकरीबन सभी एशियाई और यूरोपीय शेयर बाजारों में जबरदस्त कहर ढाया। देखते ही देखते सेंसेक्स से 1408.35 अंक छंट गए जो महज एक दिन में इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट थी। पिछले लगातार छह दिनों से गोता लगा रहे शेयर बाजार ने निवेशकों के 300 अरब डॉलर से ज्यादा की राशि चट कर ली। इसमें से तकरीबन आधे का चूना तो सोमवार को ही लगा। एक दफे तो ऐसी आंधी चली कि सूचकांक 17 हजार से नीचे जा पहुंचा, लेकिन दिन ढलते-ढलते स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ और यह 17605.35 पर बंद हुआ। सेंसेक्स में इस महीने 13.ीसदी की गिरावट देखी गई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (निफ्टी) भी 4अंकों की अभूतपूर्व गिरावट के साथ 5208.80 पर बंद हुआ। अकेले सोमवार को ही विदेशी संस्थागत निवेशकों ने करीब 3300 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि निवेशक रिजर्व बैंक के गवर्नर वाई वी रेड्डी के इस बयान से और घबरा गए कि पहले के मुकाबले विश्व वित्तीय बाजार कहीं ज्यादा अनिश्चित हो गया है। आरबीआई अगले सप्ताह अपनी मुद्रा नीति की समीक्षा करते समय दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (अमेरिका) में संभावित मंदी पर भी विचार करेगा। विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिका में मॉर्टगेज (गिरवी) संकट से बुरी तरह प्रभावित सिटी ग्रुप और मॉर्गन स्टेनली ने जमकर बिकवाली की। छह दिन विशेषरूप से सोमवार की भीषण गिरावट से जाहिरतौर पर चिंतित सरकार ने इसका ठीकरा अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता पर फोड़ते हुए निवेशकों को सचेत किया कि वे बाजार की अफवाहों व अटकलों पर ध्यान न दें। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शाम को संवाददाताआें से कहा कि पूंजी बाजार का व्यवस्थित विकास सरकार की प्राथमिकता है और ‘मैं देशवासियों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि भारतीय अर्थव्यवस्था के आधारभूत तत्व मजबूत बने हुए हैं।’

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