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महाराष्ट्र व हरियाणा की सरकारें माकपा के निशाने पर

माकपा ने देश के कई राज्यों में जाति-द्वेष के नाम पर दलितों पर हमले बढ़ने का आरोप लगाया है। पार्टी संसद के आगामी सत्र में इसे एक बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में भी है। माकपा ने आंकड़ों के आधार पर दावा किया कि कांग्रेस शासित हरियाणा में कुछ ही महीनों में दलित उत्पीड़न की 102 घटनाएं हुईं। लेकिन हरियाणा सरकार इन्हें पंचायतों व गांवांे का आपसी मामला बताकर दलितों की जान-माल की रक्षा की जिम्मेदारी से बचना चाहती है। माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य बृंदा करात के मुताबिक दलित व कमजोर वर्गों पर हमले की घटनाआें में महाराष्ट्र का भी रिकार्ड शर्मनाक हैं, जहां इसी माह की 4 तारीख को नांदेड़ जिले में एक मराठा समुदाय की सर्वण लड़की के साथ प्रेम करने के आरोप में एक दलित युवक चंद्रकांत की चाकुआें से गोदकर आंखें निकाल ली गईं। उन्होंने कहा कि हालांकि प्रशासन ने फौरन हरकत में आकर पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया लेकिन कुछ अभियुक्त भी अब भी फ रार हैं। इसे खैरलांजी जैसी ही क्रूरतम घटना बताते हुए बृंदा कहती हैं कि आजादी के 60 बरस बाद भी दलितों के साथ जानवरों से बदतर व्यवहार होना पूरी सभ्यता के लिए शर्मनाक है। बृंदा ने कहा कि उनकी पार्टी ऐसी घटनाओं के खिलाफ पूरे देश में लोगों को जागृत करेगी। उनका कहना है, ‘रिजवानुर व प्रियंका टोडी प्रेम विवाह के दुखत अंत पर वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ हफ्तों तक विषैला प्रचार करने वाली पार्टियों व मीडिया का एक बड़ा हिस्सा दलितों के खिलाफ अमानवीय कृत्यों के प्रति पूरी तरह बेखबर है।’

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  • Web Title: महाराष्ट्र व हरियाणा सरकार माकपा के निशाने पर