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जब नेताजी को भोजन नहीं दिया था हरिद्वार ने

वतंत्रता के लिए सर्वस्व बलिदान करने वाले नेता जी सुभाष चंद्र बोस को उनके अपने ही हिन्दुस्तानियों ने हरिद्वार प्रवास के दौरान भोजन परोसने से इंकार कर दिया था। हरिद्वार के भोजनालय के संचालक का तर्क था कि चूंकि वह बंगाली हैं अत: मांसाहारी हो सकते हैं। नेता जी सम्पूर्ण बांग्मय में सुभाष चंद्र बोस ने हिन्दू धर्म में व्याप्त आडम्बर एवं पाखंड का स्पष्ट उेख किया है। नेता जी सुभाष चंद्र बोस लिखते हैं कि हम उत्तर भारत के कुछ प्रसि तीथरे में गए जैसे लक्ष्मण झूला, ऋषिकेश, हरिद्वार, मथुरा, वृन्दावन, वाराणसी, गया आदि । मुझे पहला आघात हरिद्वार में एक भोजनालय में लगा जब उसके संचालक ने हमें खाना खिलाने से इंकार कर दिया। उसने कहा कि बंगाली मांसाहारी होते हैं। वे चाहें तो अपनी थाली ला सकते हैं। हम उसमें खाना डाल देंगे लेकिन उन्हेंं अपने ठहरने के ठिकाने पर जाकर खाना होगा। बोधगया में हमें ऐसी ही स्थिति का अनुभव हुआ। हम एक मठ में मेहमान थे। जब खाना खाने का समय आया तो हमसे पूछा गया कि क्या हम अलग-अलग नहीं बैठना चाहेंगे क्योंकि हम एक ही जाति के नहीं हैं। अगले दिन जब हम स्नान करने गए तो कुछ लोगों ने हमसे कहा कि हम कुएं से पानी नहीं निकाल सकते क्योंकि हम ब्राह्मण नहीं हैं। सौभाग्य से हमारे ब्राह्मण मित्र ने जो अपना यज्ञोपवित उतार कर खूंटी पर टांग दिया करता है, उस समय उसे पहना हुआ था। उसने उसे चादर के भीतर से निकालकर शान से दिखाया और उन लोगों की अवज्ञा करने के लिए तुरंत कुएं से पानी भरभर कर हमें देने लगा ।ं

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