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बिजली के लिए कम होगा बजटीय आवंटन

देश के बिजली क्षेत्र पर छाया अंधेरा इस वर्ष भी कम होता नहीं दिखता। आगामी चुनावी साल को देखते हुए इस वित्त वर्ष में सरकार की प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में इसका कोई स्थान नहीं है। सूत्रों के अनुसार, देश के बिजली क्षेत्र के लिए वित्त वर्ष 2008-0में बजटीय आवंटन वित्त वर्ष (2007-08) से 7.46 प्रतिशत कम रहने की उम्मीद है। योजना आयोग के सूत्रों ने बताया कि वित्त वर्ष 2007-08 में बिजली क्षेत्र के लिए जहां 5483 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन हुआ था, वहीं इस वर्ष अर्थात 2008-0में केवल 5074 करोड़ रुपये का ही बजटीय आवंटन होगा जोकि गत वर्ष से 7.46 प्रतिशत कम है। दरअसल, वर्ष 200में आम चुनाव होने हैं इसलिए सरकार का जोर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना, पिछड़े क्षेत्रों, अल्पसंख्यक तथा स्वास्थ्य योजनाओं जैसे वोट से जुड़े क्षेत्रों पर है। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) का ध्यान अपने चुनावी घोषणापत्र के राष्ट्रीय न्यूनतम साझा कार्यक्रम (एनसीएमपी) के क्रियान्वयन पर है इसलिए बिजली क्षेत्र पर अपेक्षाकृत कम तवज्जो दिया जा रहा है। ऐसा भी नहीं है कि बिजली क्षेत्र को पूरी तरह उपेक्षित किया जा रहा है बल्कि वर्तमान में जारी जितनी परियोजनाएं हैं, उन्हें जल्द से जल्द पूरी करने तथा मई-जून तक 15 हजार मेगावाट बिजली संवर्धन की कोशिश की जा रही है। सरकार ने बिजली क्षेत्र से जुड़ी भारी उपकरण निर्माता कंपनी भेल को अपनी क्षमता बढ़ाने को कहा है तथा बायलर्स के लिए निजी क्षेत्र की कंपनियों को आगे आने को कहा है। कुछ समय पहले एक संसदीय पैनल ने बिजली मंत्रालय को इस बात पर लताड़ लगाई थी कि उसने इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र की कंपनियों को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। इसके साथ पैनल ने इस पर संदेह व्यक्त किया था कि बिजली मंत्रालय 2012 को समाप्त होने वाले 11वें पंचवर्षीय योजना की अवधि के दौरान नई उत्पादन क्षमता टार्गेट को पूरा सकने में कामयाब हो सकता है। यह देखते हुए कि 10वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान केवल 21,180 मेगावाट बिजली लक्ष्य अर्जित की जा सकी, इसके आसार बहुत कम हैं कि 2012 तक निर्धारित एक लाख मेगावाट उत्पादन क्षमता का लक्ष्य अर्जित किया सकेगा।

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