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चिंता में घुल रहीं पाक की ‘बर्गर बेबीज’

पाकिस्तान में फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाली अभिजात वर्ग की महिलाएं जिन्हें यहां की हाई प्रोफाइल सोसाइटी में ‘बर्गर बेबीज’ कहा जाता है, अपने शरीर को लेकर उर्दू मीडियम में तालीम लेने वाली हमउम्र लड़कियों के मुकाबले अधिक चिंतित हैं। खाते-पीते परिवारों की इन लड़कियों की निगाहों में पश्चिमी देशों की महिलाआें का फीगर बसा है जिसे वे परफैक्ट मॉडल मानती हैं। ‘ब्रिटिश जर्नल ऑफ साइकोलॉजी’ द्वारा पाकिस्तानी और ऑस्ट्रेलियाई महिलाआें की शारीरिक बनावट को लेकर किए गए एक अध्ययन में काफी रोचक बातें सामने आई हैं। इस स्टडी के मुताबिक, अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ने वाली पाकिस्तानी लड़कियां अपने शारीरिक वजन को लेकर खासी चिंचित रहती हैं, जबकि उर्दू स्कूलों की छात्राआें के साथ ऐसा नहीं देखा गया है। स्टडी रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इस अंतर के पीछे कहीं न कहीं सांस्कृतिक मूल्यों का प्रभाव है। ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालय में साइकोलॉजी पढ़ाने वाली नरगिस महमूद का कहना है कि स्लिम दिखने की चाह और खानपान पर खास ध्यान देने के जिस नजरिये को सिर्फ पश्चिमी देशों तक सीमित बताया जाता था, वह अब गैर-पश्चिमी देशों में भी अहमियत पाने लगा है। नरगिस के मुताबिक, आकर्षक बनावट और स्लिम शरीर को लेकर जितनी दिलचस्पी पश्चिमी देशों में देखी जाती है, वह दूसरी संस्कृतियों में वैसी नजर नहीं आती। शायद इसी कारण इन संस्कृतियों में भी अब पश्चिमी मूल्यों को अपनाने का रुझान देखा जा रहा है। अध्ययन रिपोर्ट में कई तुलनात्मक तथ्यों का हवाला देकर कहा गया है कि वैश्वीकरण की बढ़ती प्रक्रिया के बीच यह कहना मुश्किल है कि पश्चिमी संस्कृति भविष्य में पूर्वी देशों की सांस्कृतिक मूल्यों और जीवन शैली पर किस हद तक असर डालेगी।

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