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मानवाधिकार कार्यकर्ता से मिलना पड़ा भारी

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव शरतचंद्र बेहार को मानवाधिकार कार्यकर्ता डा. बिनायक सेन से रायपुर जेल जाकर मुलाकात करना बेहद महंगा पड़ा। बेहार का डा. सेन से मिलकर उनकी तरफदारी करना छत्तीसगढ़ सरकार को इस कदर नागवार गुजरा की उसने बेहार को तुरंत नौकरी से बेदखल करने का फैसला कर लिया। पूर्व मुख्य सचिव बेहार को तीन महीने पहले ही छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा विभाग में सलाहकार के पद पर नियुक्त किया था। उन्हें राज्य के शिक्षा स्तर में सुधार की जिम्मेदारी दी गई थी। कुछ दिन पहले बेहार जानीमानी सामाजिक कार्यकर्ता मेघा पाटेकर के साथ रायपुर जेल गए और डा. बिनायक सेन से मुलाकात की। उन्होंने सरकार के डा. सेन को गिरफ्तार किए जाने के फैसले की आलोचना की। इस बयान के बाद रमन सिंह सरकार तुरंत हरकत में आई और साफ कर दिया कि उसे अपने फैसले की मुखालफत करने वाले किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं हैं। शिक्षा मंत्री अजय चंद्राकर ने उन्हें तुरंत हटाने के आदेश जारी कर दिए। इस बारे में शिक्षा सचिव नंद कुमार ने कहा कि 25 जनवरी को बेहार का कार्यकाल पूरा होने वाला था। साथ ही यह भी कहा कि बेहार ने पिछले तीन महीने के दौरान शिक्षा विभाग को कोई अहम सलाह नहीं दी। दरअसल बेहार ने डा. सेन की गिरफ्तारी के खिलाफ बोलने के अलावा सलवा जुडूम पर भी आपत्ति जाहिर की थी। डा. सेन पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। उन्हें छत्तीसगढ़ के विवादित कानून छत्तीसगढ़ स्पेशल पीपुल सेक्यूरिटी एक्ट 2005 के तहत गिरफ्तार किया गया था। वह मई 2007 से जेल में हैं।

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