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केंद्रीय राशि में बिहार की हिस्सेदारी और बढ़े : शरद

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने कहा है कि केन्द्र से राज्यों को विकास कार्यो के लिए धन मिलना कोई एहसान नहीं है। यह राज्यों का संवैधानिक अधिकार है। केन्द्र की निधि में विभिन्न राज्यों की हिस्सेदारी संचित है और उसी में से सभी राज्यों को अलग-अलग आवंटन किया जाता है। बिहार को इसी आधार पर केन्द्र से धनराशि प्राप्त होती है। इसमें कोई कृपा है क्या?ड्ढr ड्ढr श्री यादव ने केन्द्रीय राशि में बिहार की हिस्सेदारी और बढ़ाने की वकालत की और कहा कि बिहार जिस तरह 15 वर्षो तक बदहाली का शिकार रहा और पूर्ववर्ती सरकार ने जिस तरह विकास की उपेक्षा की उससे बिहार को और अधिक धनराशि की जरूरत है। इस समय नीतीश सरकार विकास के कार्यो को युद्धस्तर पर अंजाम दे रही है, उससे केन्द्रीय सहायता की दरकार और बढ़ जाती है। उन्होंने बिहार के बैंकों को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे बिहार से पैसा जमा करते हैं और अन्यत्र उसका निवेश करते हैं। बिहार के विकास के लिए वे पर्याप्त धनराशि मुहैया नहीं करा रहे। वे बिहार के पैसे को उद्योगपतियों को निवेश के लिए दे रहे हैं। यह उचित नहीं है। यह बिहार के साथ नाइंसाफी है।ड्ढr ड्ढr श्री यादव ने कहा कि कुछ नेता केन्द्र और राज्य को लेकर राजनीति कर रहे हैं। केन्द्रीय राशि को लेकर यह जताने की कोशिश कर रहे हैं कि मानो बिहार पर बड़ा अहसान हो रहा है। खासकर केन्द्र में शामिल बिहार के मंत्रियों को कटघरे में खड़ा करते हुए उन्होंने कहा कि इन्हें और कोई काम नहीं रह गया है। ये ऐसा व्यवहार करते हैं कि बिहार केन्द्र के समक्ष याचक हो और केन्द्र उसे पैसा देकर उपकार कर रहा है। उन्होंने कहा कि केन्द्र के पास जो राशि है उसमें बिहार की जनता का भी योगदान है। उसके दिए पैसे का भी केन्द्रीय खजाना में योगदान है। फिर कैसे ये लोग केन्द्र की राशि को बिहार के लिए एहसान के रूप में दिखाना चाहते हैं?ं

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  • Web Title: केंद्रीय राशि में बिहार की हिस्सेदारी और बढ़े : शरद