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किडनी की मंडी का भंडाफोड़

पाँच लाख में एक किडनी। उत्तर प्रदेश की मुरादाबाद पुलिस ने नोएडा, गुड़गाँव और फरीदाबाद में छापामार गुर्दा प्रत्यारोपण कर करोड़ों के वारे-न्यारे करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का खुलासा किया है। इस मामले में छह विदेशियों समेत करीब एक दर्जन लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें से छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। एडीजी कानून व्यवस्था बृजलाल के मुताबिक सहायक पुलिस अधीक्षक मंजिल सैनी के नेतृत्व में गठित की गई एक टीम इस मामले की पड़ताल में जुटी है। पुलिस को अलग-अलग ठिकानों से कुछ सीडी, गुर्दा प्रत्यारोपण में इस्तेमाल किए जाने वाले यंत्र और लाखों रुपए भी बरामद किए हैं। गुर्दा निकालने के लिए ज्यादातर पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के गरीब मजदूरों व रिक्शे वालों को शिकार बनाया जा रहा था।ड्ढr ड्ढr मुरादाबाद के एसएसपी प्रेमप्रकाश को विद्या प्रकाश जाटव नाम के व्यक्ित ने जानकारी दी थी कि दो साल पहले चोरी से उसकी किडनी चुराने वाला गिरोह मुरादाबाद में सक्रिय है। उसने यह जानकारी दी थी कि डा.उपेन्द्र नामक व्यक्ित अपने दलालों के साथ कुछ मजदूरों को उनकी किडनी निकालने के लिए गुड़गाँव ले जाना चाह रहा है। यह जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम व एससीएसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर एक जाँच टीम गठित की। इस जाँच टीम ने सबसे पहले सिविल लाइन थाना इलाके से फरीदाबाद निवासी जगदीश नाई और हापुड़ निवासी इरशाद गयासुद्दीन को एस्टीम कार (एचआर-2एल-7151) व डेढ़ लाख रुपए के साथ गिरफ्तार किया। इसके बाद टीम गुड़गाँव भेजी गई। गुड़गाँव के सेक्टर 23 ए में पालम विहार में मकाननम्बर 4374 पर दबिश दी गई। वहाँ तीन ऐसे व्यक्ित मिले जिनकी किडनी निकाली जा चुकी थी जबकि दो अन्य की किडनी निकालने की तैयारी हो रही थी। यहाँ से मुख्य अभियुक्त और फरीदाबाद में संजय कालोनी वल्लभगढ़ निवासी डा.उपेन्द्र अग्रवाल और गोपाल नेपाली को गिरफ्तार किया। अन्य अभियुक्तों में शामिल डा. जीवन व अन्य डॉक्टर व कर्मचारी मौके से फरार हो गए। इसके बाद गुड़गाँव के डीएलएफ फेस-1 कालोनी के एक मकान में छापा मारकर छह विदेशियों को हिरासत में लिया गया। इनमें से दो मरीज और चार तीमारदार हैं। मरीजों की खराब हालत देख उन्हें सीएमआे की देखरेख में दे दिया गया। इस गिरोह के दलाल विदेशों तक फैले हैं जो सस्ते में गुर्दा दिलाने की नीयत से विदेशियों को यहाँ लाते हैं। उनसे एक गुर्दे की कीमत पाँच लाख रुपए तक वसूली की जाती है। मेरठ मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने वाले डा.उपेन्द्र को पहले भी वर्ष 2000 में भी इसी मामले में दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके से गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था।

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