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तेल के बाजार में चल रहा सट्टेबाजी का खेल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लुका-छिपी का खेल जारी है। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के निकट पहुंचने के बाद फिलहाल 0 डॉलर के भी नीचे आ चुकी है। लेकिन इसकी कीमत कब फिर से शतक लगाने के करीब पहुंच जाए, उसके बारे में ठीक से कुछ नहीं कहा जा सकता। तेल निर्यातकारी देशों का संगठन (ओपेक) उत्पादन बढ़ाने को तैयार नहीं है। डालर की कमजोरी इसमें आग में घी डालने का काम कर रही है लेकिन सूत्र बताते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोत्तरी का सबसे बड़ा कारण इसके कारोबार में की जाने वाली सट्टेबाजी होती है। कारोबार जितना अधिक होता है, इसमें सट्टेबाजी भी उतनी ही अधिक होती है और इसी के अनुपात में कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा भी होता जाता है। कच्चा तेल अपने फील्ड से निकल कर रिफाइनरी कंपनियों तक पहुंचते पहुंचते लगभग 55-56 ट्रेडिंग कंपनियों के हाथों से गुजरता है। इनमें जमकर सट्टेबाजी होती है और सट्टेबाजों के वारे न्यारे हो जाते हैं। जाहिर है इससे जुड़े सट्टेबाजों का मकसद इससे धन बनाना होता है। अगर इसमें शामिल एक सट्टेबाज ने न्यूनतम पांच सेंट भी मुनाफा कमाया तो कुल मिलाकर कच्चे तेल की कीमत में पांच से छह डालर तक का इजाफा हो जाता है। जितनी अधिक ट्रेडिंग होती है, सट्टेबाजी भी उतनी ही अधिक होती है। इसके अलावा, इस सट्टेबाजी से बाजार में तेजी की धारणा को भी और बल मिलता है। इस मूल्य सट्टेबाजी पर अंकुश लगाया जाए तो कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में खासी कमी आ सकती है। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इतने ऊंचे स्तर पर है, इसके लिए जरूरी है कि सोलर जैसे वैकल्पिक ईंधन पर गौर किया जाए। एक दूसरा तरीका ईंधन संरक्षण और उसकी कुशलता बढ़ाने के जरिये निकाला जा सकता है। अर्थात अभी ईंधन का आउटपुट अगर 10 के स्केल पर है तो उसे 11 या 12 पर लाने की पुरजोर कोशिश की जाए।

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