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भारतीय कंपनियों को भा रही है फ्रांसीसी बयार

वे दिन हवा हुए जब विदेशों की बड़ी कंपनियां, भारतीय कंपनियों का अधिग्रहण किया करते थे। अब तो भारतीय कंपनियों की बारी है। भरोसा नहीं होता तो बोस्टन कंस्लटिंग ग्रुप की 100 उभरती हुई मल्टीनेशनल कंपनियों की लिस्ट देख लीजिए। इसमें 21 कंपनियां अकेले भारत से ताल्लुक रखती हैं। लिस्ट में भारत से आगे केवल चीन है, जिसकी 44 कंपनियां यहां हैं। वैसे पिछले कुछ सालों में भारतीय कंपनियों को फ्रांसीसी जमीन की खूशबू कुछ ज्यादा ही भा रही है। इसलिए तो वे उसकी तरफ खींचे चले जा रहे हैं। इस वक्त भारत की 40 कंपनियां फ्रांस में रजिस्टर्ड हैं। भारतीय कंपनियों की इस फ्रांसीसी प्रेम के पीछे कारण हैं। पहला तो इसका लोकेशन है, फ्रांस यूरोप के बीचोंबीच है। साथ ही, यह पूरा देश रोड्स, रेलवे, एयरपोट्स से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। इसलिए यहां समान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना काफी आसान है। यहां कंपनी को अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी भी आसानी से मिल जाती है। यहां यूरो चलता है, इसलिए कंपनियों को मनी ट्रांसफर के झंझट में ज्यादा नहीं पड़ना होता है। विश्लेषकों की मानें तो यहां निवेश का सबसे बड़ा फायदा तो यह होता है कि कंपनियों को कभी फ्रांसीसी उपनिवेश रहे 14 देशों में आराम से प्रवेश मिल जाता है। इन देशों की मुद्रा फ्रांस के बैंक बिना किसी झंझट के ले लेते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिमी देशों में वहां की कंपनियों को खरीदना आसान है। दरअसल, वहां इस वक्त मंदी चल रही है। इसलिए वे काफी सस्ते में मिल रही हैं, जबकि देसी कंपनियों के भाव भारत के तेज विकास के कारण चढ़े हुए हैं। दूसरी तरफ, फ्रांसीसी कंपनियों के अधिग्रहण से भारतीय कंपनियों की पहुंच ग्लोबल मार्केट तक हो जाती है। इससे उन्हें ऑपरेटिंग मार्जिन को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। साथ ही, अब वे नई तकनीक का आयात नहीं, बल्कि उन्हें खरीद करके भी काम चलासकते हैं।

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