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घटनारहित रहा कश्मीर का गणतंत्र दिवस

श्मीर का गणतंत्र दिवस हालांकि घटनारहित रहा है लेकिन दहशत के साए में मनाए गए इस गणतंत्र दिवस पर अलगाववादियों और आतंकी गुटों के हड़ताल के आह्वान मंे कश्मीर में नागरिक कफ्र्यू का दृश्य पैदा किया हुआ था। जम्मू के राजधानी शहर में यही हालत थी, जो सरकारी अघोषित कफ्यरू के कारण हुई थी। हालांकि गणतंत्र दिवस के दो मुख्य समारोह जम्मू तथा श्रीनगर मंे हुए थे लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के कारण सारे राज्य में अघोषित कफ्यरू लगा दिए जाने के कारण किसी भी कस्बे या शहर से लोगों ने घरों से बाहर निकलना पसंद नहीं किया। गणतंत्र दिवस के मौके पर श्रीनगर में अलगाववादी संगठनों की अपील पर आम हड़ताल रही। सुरक्षा बलों की तरफ से किए गए जबरदस्त सुरक्षा इंतजामों और आम हड़ताल के कारण श्रीनगर के बाजारों में सन्नाटा था। चश्मदीदों ने बताया कि श्रीनगर के जिन बाजारों में आम तौर पर रौनक रहती है, वे आज सूने पड़े थे। आम हड़ताल की अपील को हुरियत कांफ्रेंस का समर्थन हासिल था। गणतंत्र दिवस पर आम हड़ताल यहां एक तरह की सालाना कसरत बन गई है। श्रीनगर की खाली गलियों में आज सिर्फ सुरक्षा बलों की गाड़ियों की आवाजें ही आ रही थीं। आम लोग घरों के भीतर ही दुबके रहे। श्रीनगर के अलावा घाटी के दूसरे मुस्लिम बहुल शहरों में भी यही हाल रहा। आतंकवादी गुट लश्करे तैयबा ने गणतंत्र दिवस के मौके पर आत्मघाती हमलों की धमकी दी थी, जिसे देखते हुए घाटी में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के कर्मचारी बड़ी संख्या में तैनात किए गए थे। कश्मीर घाटी में श्रीनगर शहर की विशेषकर स्थिति यह थी कि वहां की गलियों में पसरी हुई निस्तब्धता को सिर्फ सुरक्षाकर्मियों के वाहनों का शोर, उनके बूटों की आवाज और या फिर आवारा कुत्ते ही तोड़ रहे थे। हालांकि यह कोई पहला अवसर नहीं था कि कश्मीर में इस प्रकार गणतंत्र दिवस समारोह मनाया गया हो, बल्कि पिछले 17 सालों से यही नजारे कश्मीर घाटी में देखने को मिलते रहे हैं और अब यह सब जम्मू में भी देखने को मिल रहा है। जम्मू शहर की तो हालत यहां तक थी कि आतंकवादी खतरे से निपटने की खातिर नागरिक प्रशासन ने सेना को तलब कर लिया था। हालांकि सेना के नियमित जवान तो उसे सुरक्षा के लिए नहीं मिल पाए लेकिन सेना पुलिस को उसने अवश्य तैनात कर दिया था। इसके बावजूद आशंका का आलम यहां तक था कि जिन मुख्य स्टेडियमों में मुख्य समारोह होने थे, वहां के आसपास के घरों पर सुरक्षाकर्मियों ने कब्जा कर रखा था और उन्होंने इन घरों के भीतर रहने वालों को मुंह तक बाहर नहीं निकालने दिया।

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