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निरक्षरता मिटाकर ही नंम्बर वन बनेगा सूबा

निरक्षरता को जड़ से मिटाकर ही बिहार बीमारू प्रदेश की श्रेणी से बाहर निकल पायेगा। राज्य में उपजाऊ मिट्टी, अनुकूल जलवायु, सस्ता श्रम और स्वच्छ जल सबकुछ उपलब्ध है। अगर शिक्षा प्रणाली दुरुस्त हो जाए तो बिहार कुछ ही वर्षो में ‘नम्बर वन’ राज्यों में शुमार होगा। ए.एन.सिन्हा इन्स्टीच्यूट में ‘बिहार में साक्षरता अभियान नई दिशा-नई पहल’ पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में आम राय उभरी कि निरक्षरता उन्मूलन के लिए सरकारी साधनों पर आत्मनिर्भरता ठीक नहीं। महिलाआें, अल्पसंख्यकों और महादलितों जैसे शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गो को लक्ष्य करके सरकार और समाज को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है। आम आदमी का सहयोग और समर्थन मिले तभी साक्षरता अभियान जनआंदोलन का रूप लेगा।ड्ढr ड्ढr शनिवार को कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वर्ष 2011 में जनगणना का प्रतिवेदन आएगा। उसमें बिहार को साक्षरता के क्षेत्र में अच्छी स्थिति में देखना है तो इसके लिए हमें विशेष कार्यक्रम भी तय करने होंगे। मानव संसाधन विकास मंत्री की अध्यक्षता में एक उपसमिति बनाई गयी है। विगत वषर्ों में साक्षरता के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों का बिहार लाभ नहीं उठा पाया। महिलाआें, अल्पसंख्यकों और महादलितों में निरक्षरता की दर अधिक है। मुसहरों की साक्षरता दर मात्र 6 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि बालिका साक्षरता में वृद्धि, स्कूली शिक्षा के सुदृढ़ीकरण, महिला सशक्तीकरण और महादलितों के सामाजिक और शैक्षणिक स्तर में सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाये गये हैं। इसका सकारात्मक असर दिख रहा है लेकिन अभी काफी काम करना है। सरकार इस कार्यशाला के निष्कर्षो पर अमल करेगी।ड्ढr ड्ढr शिक्षा मंत्री वृषिण पटेल ने कहा कि वैश्वीकरण के दौर में अगर कोई हिस्सा पीछे छूटा तो देश विकसित नहीं माना जायेगा। लोगों को साक्षर बनाने के साथ-साथ उनके आर्थिक विकास के लिए भी कार्यक्रम बनाना होगा तभी लोग इस अभियान के प्रति जागरूक होंगे। केरल के शिक्षाविद् प्रोफेसर के.कृष्ण कुमार ने साक्षरता अभियान को मिशन मानकर विशेष प्रयास की आवश्यकता जतायी। उनका कहना था कि जिस दिन इस अभियान में पैसा आ जायेगा उसी दिन इसका मूल मकसद समाप्त हो जायेगा। साक्षरता दर के मामले में बिहार अब राष्ट्रीय औसत से बहुत पीछे नहीं है। अगर पंचायतों की मदद ली जाये तो स्थिति सुधर जायेगी। मानव संसाधन मंत्रालय में निदेशक, प्रौढ़ शिक्षा अलका भार्गव ने राज्य के अधिकारियों को निरक्षरों का जिलावार का ब्योरा तैयार करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि एक बार निरक्षरों की पहचान हो जाने से लक्षित समूह के बीच साक्षरता अभियान चलाना आसान होगा। शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह ने स्वागत भाषण करते हुए शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े क्षेत्रों के लिए विशेष योजना बनाने पर जोर दिया। कार्यशाला में डॉ. माधव चौहान, विनोद रैना, अनीता रामपाल, डॉ. रुक्िमणी बनर्जी समेत बड़ी संख्या में शिक्षाविद मौजूद थे।ड्ढr ड्ढr जमा दो स्कूलों को चकाचक बनाने में जुटा विभागड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। कालेजों से हटाकर जमा दो की पढ़ाई विद्यालयों में शुरू कराने से पूर्व शिक्षा विभाग इनके लिए चिह्न्ति स्कूलों को चकाचक बनाने में जुट गया है। संबंधित स्कूलों में इसके लिए भवन निर्माण और उत्क्रमण की तैयारी चल रही है। जानकारी के अनुसार सरकार ने भवनहीन विद्यालयों के लिए इमारत उपलब्ध कराने वास्ते योजना मद से 35 प्रोजेक्ट कन्या विद्यालयों के सुदृढ़ीकरण के लिए 24 करोड़ रुपए दिए हैं। साथ ही गैर योजना मद से 250 माध्यमिक स्कूलों और 250 प्रोजेक्ट कन्या विद्यालयों को जमा दो में उत्क्रमित किया गया है। जानकारी के अनुसार इसके अतिरिक्त गत वित्तीय वषों में 400 माध्यमिक विद्यालयों के सुदृढ़ीकरण के लिए विविध मदों में क्रमश: 62 करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध कराई गई है।ड्ढr ड्ढr मालूम हो कि प्रति विद्यालय 56.50 लाख रुपए की दर से कुल 56.50 करोड़ रुपए पूर्व से संचालित 100 (जमा दो) विद्यालयों में हर तरह की सुविधाएं मुहैया कराने के लिए दिए गए हैं। इसके अलावा गत वित्तीय वर्ष में 500 (जमा दो) स्कूलों को भी प्रति विद्यालय इतनी ही राशि उपलब्ध कराई गई है। गौरतलब है कि सरकार अगले सत्र से सूबे के बाकी बचे कालेजों मंे भी इंटरमीडिएट की पढ़ाई खत्म करने वाली है। इसकी पढ़ाई अब सिर्फ जमा दो स्कूलों में होगी। अभी 400 से अधिक कालेजों और 100 के लगभग स्कूलों में इंटर के विभिन्न कोर्सो की पढ़ाई होती है। सरकार द्वारा इस मद की राशि जारी होने के बाद मानव संसाधन विकास विभाग ने 518 इंटरस्तरीय स्कूलों का चयन कर लिया है। इनमें इंटरस्तरीय पढ़ाई शुरू करने के लिए प्रावधानित राशि के व्यय की समीक्षा चल रही है।ं

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