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रोबोटिक मशीनें कार उद्योग की जान!

रोबोट के नायाब करतब अक्सर अखबारों की सुíखयां बनते रहते हैं। बात ऑपरेशन करने की हो या दुकान चलाने की, रोबोट्स आज इन कामों को बेहद सधे अंदाज में अंजाम दे रहे हैं पर इनका करिश्मा यहीं तक सिमटा हुआ नहीं है। कारों की मैन्यूफेक्चरिंग में भी रोबोट्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। रोबोटिक मशीनें आज कार उद्योग की जान है। सियाम के डीजी दिलीप चेनाय ने बताया कि रोबोट्स मशीनें कारों की बेल्डिंग, पेंटिंग और शीशे चढ़ाने से लेकर वह हर बारिक काम कर रही हैं, जिन्हें करना एक आम कामगार के लिए मुश्किल है। रोबोटिक मशीनों की मदद से कार के कलपुर्जे लगाए जाने से कारों के निर्माण की गति भी बढ़ जाती है। इस बार ऑटो एक्सपो में पहली बार ऐसी मशीनों को प्रदíशत किया गया। अमेरिकी कंपनी फोरी की इंडियन यूनिट फोरी ऑटोमेशन इंडिया के जीएम नितिन चुघ कहते हैं कि मैनुअल काम के मुकाबले नजाकत और नफासत से काम करने वाली ये रोबोट्स मशीनें जाहिर तौर पर कारों को गुणवत्ता देने में मददगार साबित होती हैं। कारों में शीशे चढ़ाए जाने की ही बात करें, तो इस काम को मैनुअली करने पर शीशा टूटने का खतरा रहता है। कारों के अगले हिस्से में लगे शीशे की कीमत करीब 15-20 हजार रुपए तक होती है पर रोबो मशीनें काफी सावधानी से यह काम कर देती है। उन्होंने बताया कि कार के निर्माण के बाद इसे तीन तरह के परीक्षणों से गुजरना पड़ता है। ये हैं व्हील अलायमेंट टेस्ट, हेडलाइट एमिंग टेस्ट और ब्रेक टेस्ट। व्हील अलायनमेंट टेस्ट के तहत यह देखा जाता है कि कार के पहिए सही तरह और सही एंगल में लगे हैं या नहीं। कार की हेडलाइट सही दिशा में रोशनी फैला रही है या नहीं। इसके लिए हेडलाइट एमिंग टेस्ट होता है। ब्रेक टेस्ट ब्रेक की जांच के लिए किया जाता है। चुघ ने बताया कि ये तीनों ही परीक्षण महत्वपूर्ण है और इसमें होने वाली कोई भी मानवीय भूल हादसे का कारण बन सकती है। इसलिए ये टेस्ट रोबो मशीनों की मदद से किए जाते हैं। टाटा मोटर्स ने अपनी नैनो कार के इन तीनों परीक्षणों के लिए रोबो मशीन की सप्लाई का जिम्मा फोरी ऑटोमेशन को ही सौंपा है।

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