DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

हिन्दुत्व एजेंडे से भटक रही भाजपा

पार्टी के लौह पुरुष लालकृष्ण आडवाणी की रहनुमाई में केन्द्र की सत्ता में काबिज होने के लिये बेचैन भाजपा अपने हिन्दुत्व के एजेंडे से भटकती दिख रही है। हिन्दुत्व से हटने का आग्रह उस पर इसलिये भी है कि इस मसले को लेकर उस पर एनडीए का जबर्दस्त दबाव है। शायद इसीलिये उसने अपने मातृ संगठन संघ परिवार के मुद्दे रामसेतु से भी किनारा कर लिया है। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की रविवार को हुई बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने रामसेतु पर खरा-खरा कुछ नहीं कहा। यह बात दीगर है कि इस मुद्दे पर 28 फरवरी से शुरू होने वाली दो दिवसीय राष्ट्रीय परिषद की बैठक में रामसेतु पर चर्चा की जायेगी। एनडीए के विस्तार की मंशा के चलते ही राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और वामपंथियों पर तो हमला बोला। लेकिन उन्होंने राज्यों में अपने विरोधी होने के बावजूद किसी भी क्षेत्रीय दल का जिक्र तक नहीं किया। पार्टी की कार्यकारिणी पूरी तरह से चुनावी मोड़ पर दिखी। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2007 भाजपा की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण रहा। इस वर्ष हमने चार राय विधानसभा चुनावों में विजय प्राप्त की। यह भाजपा के इतिहास में प्रथम अवसर है, जब हमने एक वर्ष में चार सरकारें बनाई हैं। वर्ष 2007 का दिसंबर भी हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण रहा। इस माह में हमने अपने दल की आेर से भावी प्रधानमंत्री के रुप में आडवाणी का नाम तय किया। उन्होंने आडवाणी को प्रधानमंत्री बनाने के लिये कार्यकर्ताआें को जी जान से जुट जाने का आहन किया। आडवाणी को उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उत्तराधिकारी के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि वाजपेयी ने अपने कंधे का भार आडवाणी को सौंपते हुये आशीर्वाद दिया है। अटल जी सदैव से हमारे प्रेरणास्त्रोत रहे हैं और आगे भी रहेंगे। वाजपेयी की गैर मौजूदगी में हुई कार्यकारिणी की इस बैठक में राजनाथ सिंह ने वाजपेयी की उपलब्धियों का खूब गुणगान किया। एनडीए की ही तरह राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक भी वाजपेयी की प्रतिछाया से उबर नहीं सकी। यूपीए सरकार की नाकामियों, गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, किसान आत्महत्या, बांग्लादेशी घुसपैठ, आतंकवाद आदि तमाम मुद्दे अध्यक्ष ने उठाए, लेकिन इनसे जूझने के लिये उन्होंने कार्यकर्ताआें को कोई आंदोलनात्मक कार्यक्रम नहीं दिया। उनके अध्यक्षीय भाषण में चुनाव और चुनाव की ही गूंज और अनुगूंज थी। बीते साल सितंबर माह में भोपाल में हुई कार्यकारिणी की बैठक के बाद से दिल्ली की इस कार्यकारिणी तक भाजपा ने विचार और मुद्दों पर कोई प्रगति नहीं की। राजनीतिक प्रस्ताव से लेकर कृषि तक के प्रस्ताव नई बोतल में पुरानी शराब जैसे हैं। बैठक में चार राज्यों में होने वाले चुनाव के बारे में वहां की इकाईयों ने अपनी रिपोर्ट रखी। हिमाचल और गुजरात में जीत पर रिपोर्ट रखी गई। पार्टी अध्यक्ष राजनासिंह ने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों नरेन्द्र मोदी और प्रेम कुमार धूमल को बधाई देते हुये उनकी पीठ थपथपाई।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: हिन्दुत्व एजेंडे से भटक रही भाजपा