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मिठाई के लिए जेलर बंधक

जनवरी को झंडोत्तोलन के बाद बाढ़ जेल में कैदियों ने दुस्साहस दिखाते हुए जेलर को न सिर्फ बंदी बना लिया बल्कि उन्हें जख्मी भी कर दिया। झंडा फहराने के बाद कैदियों ने मिठाई, पानी एवं अन्य सुविधाओं की मांग कर रहे कारापाल संजय कुमार सिंह को बंधक बना लिया। जेल प्रशासन ने पगली घंटी बजाकर घटना की जानकारी अनुमंडल प्रशासन को दी। घटना जेल के वार्ड सं. 7 में हुई जहां सरगना निरजेश सिंह उर्फ नागा सिंह के अलावा अन्य कुख्यात अपराधी न्यायिक हिरासत के तहत बंदहै।ड्ढr ड्ढr घटना की सूचना मिलते ही कार्यपालक दंडाधिकारी एन के झा, आरक्षी उपाधीक्षक अशोक कुमार चौधरी तत्काल भारी पुलिस बल के साथ जेल पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित कर कारापाल को सकुशल बचाया। बातचीत के दौरान बंदी अशोक कुमार सिंह ने ईंट जेलर पर चला दिया जिससे वे गंभीर रूप से जख्मी हो गए। जेलर के साथ गए जमादार छबिला दास, आरक्षी मिथलेश प्रसाद सिंह एवं देव नारायण सिंह भी जख्मी हो गए। सभी घायलों का उपचार सदर अस्पताल में किया जा रहा है। झंडोतोल के बाद जेल के अंदर कारापाल एवं आरक्षी के ऊपर हुए प्राणघातक हमला की प्राथमिकी बाढ़ थाने में दर्ज की गई है। दर्ज प्राथमिकी में हत्याकांड के मामले में बंद अशोक कुमार सिंह को अभियुक्त बनाया गया है।ड्ढr ड्ढr इस बीच वार्ड नम्बर 7 को कैदियों के बीच शनिवार को हुई झड़प के 10 कैदियों को बेउर जेल स्थानान्तरित कर दिया। जेल आईजी एवं पटना प्रशासन की सहमति के बाद सुरक्षा बल की उपस्थिति में कारापाल पर प्राणघातक हमला करने वाले अशोक सिंह, बबलू सिंह सहित जेल में उपद्रवियों के रूप में चिन्हित 10 बंदियों का स्थानान्तरण किया गया है। प्राणघातक हमला में जख्मी कारापाल संजय कुमार स्वस्थ हैं वहीं दूसरी ओर उपकारा में भी शांति व्यवस्था कायम है। उल्लेखनीय है कि क्षमता से चार गुणा अधिक बंदी बाढ़ उपकारा में बंद है। बंदियों को जेल मैनुअल के अनुसार भोजन नहीं मिलता है। लगभग 600 बंदी दो चापाकलों पर निर्भर हैं। बंदियों को खाद्यान्न जेल प्रशासन द्वारा दिया जाता है। बंदियों के उपचार वास्ते फर्स्ट एड सहित आवश्यक दवा जेल प्रशासन द्वारा दिया जाता है। लेकिन जेल चिकित्सक अपनी सेवा हमेशा नहीं दे पाते हैं। आये दिन रोगग्रस्त बंदियों को पैदल या रिक्शा से उपचार कराने सदर अस्पताल लाया जाता है। उपकारा में सजायाफ्ता बंदी भी हैं। बहरहाल जेल प्रशासन व्यवस्था में सुधार एवं शांति कायम करने के लिए दस उपद्रवी बंदियों को केन्द्रीय आदर्श कारा बेऊर भेज दिया। जेल के अंदर बंदी मोबाइल से लैस होकर तमाम सुविधा की व्यवस्था के लिए जेल प्रशासन पर दबाव बनाते रहते हैं।

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