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दो-तीन दिन में खुल जाएँगी कैण्टीन

वैट से छूट मिलने के बाद राज्य कर्मचारी कल्याण निगम की कैण्टीनों से बिक्री दो-तीन दिन में शुरू हो जाएगी। निगम के अधिशासी निदेशक मुकेश गुप्ता ने इस बात के संकेत दिए हैं। करीब एक माह से कैण्टीनों के बंद होने से निगम को लगभग 52.50ड्ढr लाख रुपए का नुकसान हुआ है। इसके मद्देनजर निगम के कर्मचारी नेताआंे ने जनवरी माह के वेतन के लिए सरकार से धनराशि की माँग की है।ड्ढr राज्य कर्मचारी कल्याण निगम की कैण्टीन राज्य में वैट लागू होते ही बंद हो गई। इन कैण्टीनांे से करीब 20 लाख कर्मचारियों को व्यापार कर मुक्त सामान मिलता था। करीब 146 कैण्टीनों में निगम का छह करोड़ 42 लाख रुपए का माल बिक्री न होने से निगम को लाभ के रूप में मिलने वाले करीब 50 लाख रुपए से वंचित होना पड़ा। साथ ही दो करोड़ रुपए के बैंक आेवर ड्राफ्ट को समय से अदा न कर पाने के एवज में निगम को ब्याज के रूप में बंदी अवधि का करीब ढाई लाख रुपए बैंक को अदा करना पड़ेगा। इस प्रकार निगम प्रबंधन को 52.50 लाख रुपए की क्षति उठानी पड़ी है। ऐसे में निगम कैण्टीन कर्मचारियों को जनवरी माह का वेतन दे पाने की स्थिति में नहीं है।ड्ढr कर्मचारी नेताआें ने माँग की है कि जनवरी माह के उनके वेतन की व्यवस्था सरकार करें। निगम के अधिशासी निदेशक मुकेश गुप्ता ने बताया कि वाणिज्य कर विभाग द्वारा वैट से छूट दिए जाने की अधिसूचना जारी होते ही कैण्टीनांे से बिक्री शुरू हो जाएगी। कर्मचारियों के वेतन के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे इसके लिए सरकार से मदद की अपील करेंगे। बीडीएस से इंटर्नशिप खत्मड्ढr लखनऊ (कासं)। चिकित्सा विश्वविद्यालय में बीडीएस के कोर्स से इंटर्नशिप की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। इंटर्नशिप की जगह अब पाठय़क्रम की अवधि एक वर्ष बढ़ जाएगी। लिहाजा बीडीएस पाठय़क्रम अब साढ़े चार की बजाय साढ़े पाँच वर्ष का हो जाएगा।ड्ढr सोमवार को चिकित्सा विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल की बैठक में इस निर्णय को मंजूरी दे दी गई। कुलपति डॉ. एसके अग्रवाल समेत विभागाध्यक्ष व प्रोफेसरों की मौजूदगी में हुई एकेडमिक काउंसिल की बैठक में अधिकतर मुद्दे पारित ही नहीं हो सके। डेण्टल काउंसिल ऑफ इंडिया (डीसीआई) के पत्र के आधार पर बीडीएस की पढ़ाई से इंटर्नशिप हटा दी गई। डीसीआई ने अपने पत्र में कहा है कि दंत संकाय के छात्र साढ़े चार वर्ष की शिक्षा के दौरान ही प्रैक्िटकल पढ़ाई का ज्ञान हासिल कर लेते हैं। ऐसे में एक वर्ष के इंटर्नशिप का औचित्य नहीं रह जाता। इसे देखते हुए इंटर्नशिप समाप्त कर कोर्स की अवधि बढ़ा दी गई है। वहीं एमबीबीएस डिग्रीधारी डॉक्टर अब चिविवि में ‘ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंसेज’ विषय पर एमफिल कर सकेंगे। देश के 18 से अधिक चिकित्सा संस्थानों में से चिविवि को कोर्स शुरू करने के लिए चुना गया है। डिपार्टमेंटल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की मदद से शुरू हो रहा यह कोर्स दो वर्षीय होगा। कोर्स निदेशक व चिविवि की रिसर्च सेल प्रभारी डॉ. शैली अवस्थी ने बताया कि 10 सीटों वाले कोर्स में एमबीबीएस कर चुके चयनित विद्यार्थी को 15 हजार रुपए प्रति माह मिलेंगे। एकेडमिक काउंसिल की बैठक में दंत संकाय के ऑपरेटिव डेण्टिस्टी विभाग का नाम बदलकर कंजरवेटिव डेण्टिस्टी कर दिया गया। बैठक में मानसिक रोग, मेडिसिन, पल्मोनरी, ईएनटी विभाग समेत अन्य मामले इसलिए पारित नहीं हो सके क्योंकि इसे पूर्व में फैकल्टी बोर्ड की बैठक में पहले पारित नहीं कराया गया था।

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