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बिना बोले जीभ उखाड़ने की धमकी, बोले तो..

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार केन्द्र की संप्रग सरकार में शामिल बिहार के कुछ मंत्रियों से इतना डरते हैं कि उनके मामले में कुछ भी बोलने से पहले दस बार अंजाम की सोचते हैं। कहते हैं ‘जब नहीं बोलते तब तो जीभ उखाड़ने की धमकी दी जाती है। अगर कुछ बोल दिया तब तो ‘वे लोग’ चमड़ी ही उधेड़ लेंगे।’ मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को उसके सहयोगियों से सचेत रहने की सलाह देते हए कहा कि कांग्रेस का भट्ठा उसके कुछ सहयोगी दल ही बैठा देंगे। सोमवार को जनता दरबार के बाद संवाददाताओं ने जब उनका ध्यान जमीन अधिग्रहण के लिए रेलवे कानून में संशोधन की ओर दिलाया तो मुख्यमंत्री बोले- जो लोग रेलवे परियोजनाओं के लिए जमीन नहीं देने के लिए राज्य सरकार को दोषीठहराते हैं, उनकी नीयत साफ नहीं है। हम तोजनवरी में ही रेलवे अधिकारियों को बुलाकर बात करना चाहते थे। पता तो चले कि कहां दिक्कत हो रही है?ड्ढr ड्ढr इसी बीच रेलमंत्री का बयान आया है कि रेलवे के कानून में संशोधन किया जायेगा। हमें कोई एतराज नहीं। एनएचडीपी तो ऐसा पहले से ही करता है। हालांकि कानून संशोधन से पहले रेलमंत्री को यह भी बताना चाहिए कि बिहार में रेलवे के पास पहले से उपलब्ध जमीन पर क्या हो रहा है? रेलवे अगर जबरदस्त मुनाफे में है तो पैसे का सदुपयोग होना चाहिए। हरनौत कारखाने का काम क्यों बन्द है? दनियांवा रेल लाइन का काम चार साल से रुका है। कप्तानगंज-थावे अथवा पटना-गया लाइन का मामला भी खटाई में है। मेरी तो गुजारिश है कि मीडिया मेरी या उनकी बातें सुनने की बजाय स्वतंत्र रूप से जांच कर सच्चाई सबके सामने लाए। रेलवे को जमीन नहीं मिलने के लिए राजद ही दोषी है। क्या जरूरत थी दो साल तक तख्ती-डंडे लेकर ‘जान देंगे-जमीन नहीं देंगे’ आंदोलन करने की। उन लोगों ने पूरे राज्य में जमीन अधिग्रहण को लेकर नकारात्मक माहौल पैदा कर दिया। राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना अथवा ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में बिहार में अच्छा काम होने की केन्द्र की रिपोर्ट का हवाला देकर मुख्यमंत्री कहते हैं कि हम पर बिना मतलब के अनर्गल अरोप लगाते रहने वाले बिहार के केन्द्रीय मंत्रियों को कम से कम अब तो सोचना ही चाहिए। मुख्यमंत्री यह तो नहीं बताते कि उन्हें डराकर बैकफुट पर रखने वाले केन्द्रीय मंत्री कौन हैं पर यह इशारा करते हैं कि ‘वे’ मजबूत हैं जबकि हम शारीरिक रूप से कमजोर। उनसे लड़ भी नहीं सकते। दिल्ली-पटना ट्रेन यात्रा का अनुभव कैसा रहा, मुख्यमंत्री कहते हैं, रेलवे तो मेरे लिए सम्मोहन है। बचपन से ही रेल यात्रा में मजा आता था। इसलिए हम इस बारे में कुछ नहीं बोलेंगे।

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