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भू-विज्ञान से जुड़ी घटनाआें की जानकारी के लिए वेबसाइट

उत्तराखंड में भूस्खलन से प्रभावित व संभावित क्षेत्र कौन सा है? गंगोत्री ग्लेशियर व आल्पस पर्वतमाला पर कितनी बर्फबारी हुई? लखनऊ समेत दुनिया में भूकम्प से प्रभावित कौन सा क्षेत्र अधिक संवेदनशील है? इसकी अपडेट जानकारी देने के लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के वैज्ञानिक ने एक वेबसाइट तैयार की है। इसमें प्राकृतिक आपदाआें की पूरी जानकारी दी जा रही है।ड्ढr व्यक्ितगत कोशिशों से तैयार इस वेबसाइट को भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (इनसा) की वेबसाइट से जोड़ा गया है। वेबसाइट को संयुक्त राष्ट्र संघ के ‘अन्तरराष्ट्रीय प्लेनेट अर्थ वर्ष 2007-0’ के नीदरलैंड स्थित आयोग ने भी मान्यता दे दी। वेबसाइट तैयार करने वाले वैज्ञानिक का दावा है कि भूविज्ञान के क्षेत्र में घट रही घटनाआें की जानकारी देने वाली इस तरह की यह पहली वेबसाइट है। समूची पृथ्वी पर भूविज्ञान के क्षेत्र में क्या हो रहा है, इसके लिए विश्व के सभी भूविज्ञानियों को इस वेबसाइट से जोड़ा गया है। ड्ड द्धrद्गथ्=द्धह्लह्लश्चज्222.द्गड्डrह्लद्धह्यष्न्द्गठ्ठष्द्गन्ठ्ठस्र्न्ड्ड.न्ठ्ठथ्o222.द्गड्डrह्लद्धह्यष्न्द्गठ्ठष्द्गन्ठ्ठस्र्न्ड्ड.न्ठ्ठथ्o नामक इस वेबसाइट से सवाल-जवाब भी किया जा सकता है। 26 जनवरी को इसे चालू कर दिया गया।ड्ढr वेबसाइट तैयार करने वाले जीएसआई के वैज्ञानिक डॉ. सतीश चन्द्र त्रिपाठी के मुताबिक देश के 50 संगठनों के भूवैज्ञानिक इस वेबसाइट से सीधे जुड़ेंगे। उनका कहना है कि संयुक्त राष्ट्र के अन्तरराष्ट्रीय अर्थ प्लेनेट वर्ष 2007-0ो केन्द्र मानकर यह वेबसाइट तैयार की गई है। इसका मकसद आम लोगों और भू-वैज्ञानिकों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान करना है। इस वेबसाइट में संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित 10 विशेष विषयों के सम्बंध में जानकरी देने की कोशिश की जाएगी। जिन विषयों को शामिल किया गया उनमें आपदा प्रबंधन, भूजल, पृथ्वी व स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन आदि शामिल हैं। सहकारिता विभाग के दो अफसरों के निलम्बन पर न्यायालय की रोकड्ढr राज्य मुख्यालय (वसं)। उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव बैंक इम्प्लाइज कोआपरेटिव सोसायटी के सचिव पीसी श्रीवास्तव व यूपी कोआपरेटिव बैंक के महाप्रबन्धक जेएमएस यादव के निलम्बन पर उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इन अफसरों को पिछले पखवाड़े निलम्बित कर दिया गया था। सहकारिता विभाग के जिला सहायक निबंधक द्वारा पद सृजन की स्वीकृति दी गई थी, लेकिन विभागीय जाँच में उसे फर्जी बताया गया था। इसके आधार पर विभाग के प्रमुख सचिव देश दीपक वर्मा ने फर्जी पत्र पर नियुक्ित करने के मामले में दोनों अधिकारियों को निलम्बित करने के आदेश दिए थे। उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ के न्यायमूर्ति यूके धवन और न्यायमूर्ति डीपी सिंह ने सुनवाई में जिला सहायक निबन्धक व उप निबंधक के पद सृजन के पत्र का सही पाया और इन पत्रांे को फर्जी बताने वाले अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। उच्च न्यायालय ने इस प्रकरण में बार-बार जाँच कराए जाने के मामले को भी गम्भीरता से लिया और कहा कि इस कार्यवाही से विभाग के अधिकारियों की मंशा पर संदेह होता है। जिला सहायक निबंधक एके सिन्हा से पुन: जाँच कराने पर रोष भी व्यक्त किया।

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