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भारत जीता भज्जी मुक्त

बीसीसीआई का दबाव और बदले हालात का लाभ भज्जी को मिला, जब यहां उन पर लगे नस्ली टिप्पणी का आरोप बिना किसी सबूत के चलते साबित नहीं हो सका और जज हेंसन ने मैच रेफरी प्राक्टर द्वारा लगाए गए तीन टेस्ट मैचों के प्रतिबंध को हटाने का फैसला किया, लेकिन अशोभनीय टिप्पणी का दोषी मानते हुए मैच शुल्क का 50 प्रतिशत काटने की सजा सुनाई।ड्ढr ड्ढr इसी के साथ टीम इंडिया कैंप में खुशी छा गई और सबने इसी जीत के रूप में देखा । वैसे सुनवाई के पहले आस्ट्रेलिया और भारत की ओर से एक समझौते का प्रारूप भी तैयार हुआ था और साइमंड्स ने अपने आरोप वापस भी लेने का फैसला जज को सुनाया था। बोर्ड ने सारे घटनाक्रम के आलोक में आस्ट्रेलिया का दौरा जारी रखने का एलान कर एक माह से चले आ रहे प्रकरण का पटाक्षेप कर दिया। सुबह हेंसन ने एडिलेड के फेडरल कोर्ट में सुनवाई की। उस दौरान भारत कीओर से मीडिया मैनेजर श्रीधर, सचिन और हरभजन मौजूद थे तो आस्ट्रेलिया का पक्ष हेडन, क्लार्क, पोंटिंग और साइमंड्स ने रखा। हेंसन ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने और वीडियो क्िलप देखने के बाद फैसला दिया कि कोई ठोस सबूत यह साबित नहीं कर रहा है कि भज्जी और साइमंड्स के बीच वास्तव में क्या हुआ था। हेंसन ने हालांकि कहा कि भज्जी ने जो कुछ कहा, उससे यह पता चला कि उनकी टिप्पणी आईसीसी की आचार संहिता के लेबल 2.8 के अंतर्गत एतबार के काबिल है और इसीलिए उन्हें उस मैच का आधा शुल्क काटने की सजा दी जाती है।ड्ढr ड्ढr वैसे तो इस लेबल में एक टेस्ट या एकदिनी का प्रतिबंध और पूरे मैच का शुल्क काटने की सजा का प्रावधान है, लेकिन चूंकि भज्जी ने 1े बाद मैदान में लेबल 3.3 का कोई आचरण नहीं किया था, इसलिए उनकी सजा में नरमी बरती गई। इस फैसले से जहां भारतीय कैंप ने खुशी जताई तो कंगारुओं ने भी राहत की सांस ली। बीसीसीआई ने निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अब जबकि हमें न्याय मिल चुका है तो दौरा जारी रखना क्रिकेट के हित में होगा। भज्जी ने भी माना कि उन्होंने गर्मागर्म माहौल में कुछ बातें कहीं थीं, लेकिन नस्ली टिप्पणी नहीं की थी। हेंसन ने उनकी बात को साइमंड्स के आरोप वापस लेने की रौशनी में तवज्जो दी और हल्की सजा सुनाई। इसके पहले भज्जी के वकील वीआ मनोहर और आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के वकील वार्ड ने टेलिक्रांफ्रेंसिंग के जरिए जिरह की। असल में बीसीसीआई और क्रिकेट आस्ट्रेलिया ने पूरे मामले को सुलझाने के लिए पर्दे के पीछे से भूमिका निभाई। दोनों टीमों के उन खिलाड़ियों ने एक आम सहमति पर दस्तखत किए, जो इस विवाद में शामिल थे या जिनकी भूमिका अहम हो सकती थी, इससे एक राय कायम करने में मदद मिली। आईसीसी के प्रवक्त समीउल हसन ने इसकी तस्दीक की कि उस समझौते के पत्र ने हेंसन को एक स्वीकार्य फैसला लेने में मदद की।

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